Jat Reservation : किसान आंदोलन से बैकफुट पर आई सरकार के लिए अब जाट आरक्षण मुश्किलें पैदा करेगा। केंद्र सरकार में आरक्षण की मांग कर रहे जाट समाज ने अब आंदोलन की राह पकड़ने का फैसला किया है। इसके लिए मेरठ में 22 जिलों के जाट समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आरक्षण आंदोलन का खाका तैयार किया।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ . Jat Reservation : विधानसभा चुनाव से पहले मेरठ से जाट आरक्षण का मुददा गरमाने की तैयारी चल रही है। यह जाट आरक्षण अगर चुनाव से पहले जोर पकड़ गया तो भाजपा के लिए बड़ी सिरदर्दी पैदा करेगा। बता दें कि केंद्र में आरक्षण की मांग जाट पिछले कई सालों से कर रहे हैं। जाट आरक्षण को लेकर मेरठ में कई बड़े कार्यक्रम हो चुके हैं। मेरठ जाट आरक्षण आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। अब एक बार फिर से जाट आरक्षण का मामला यहीं से गर्माने की तैयारी शुरू की जा चुकी है।
रविवार को मेरठ में प्रदेश भर के 22 जिलों के जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए। जिन्होंने एक सुर में कहा कि चुनाव से पहले भाजपा की केंद्र सरकार को आरक्षण देना होगा। अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो जाट सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जाट आरक्षण आंदोलन के संरक्षक मेजर जनरल एसएस अहलावत ने कहा कि केंद्र में जाटों का आरक्षण राजनीतिक कमजोरी के कारण खत्म कर दिया गया है।
2005—6 से चल रहा है आंदोलन
जाट आरक्षण आंदोलन वर्ष 2005-06 से चल रहा है। यह आंदोलन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सहित 13 प्रदेशों में लगातार चल रहा है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने आरोप लगाए कि इस आंदोलन में विभिन्न प्रांतों में 18 युवाओं की हत्याएं अब तक हो चुकी हैं। वहीं इससे पूर्व इस आंदोलन में पूर्ववर्ती सरकार के समय 3 जाट युवक शहादत दे चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी केंद्र सरकार नहीं जागी है।
पश्चिमी उप्र में भाजपा के लिए बनेगा मुसीबत
पश्चिमी उप्र में एक ओर जहां भाजपा अपनी जीत का मार्ग प्रशस्त करने में कड़ी मेहनत कर रही है। वहीं दूसरी ओर अगर जाट आरक्षण का मुददा तूल पकड़ता है तो यह भाजपा के लिए सबसे नुकसान देह साबित होगा। जाट आरक्षण आंदोलन के संरक्षक मेजर जनरल एसएस अहलावत का कहना है कि जाटों की किसी से कोई लड़ाई नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा जब तक सत्ता में नहीं आई थी तब तक वो जाट आरक्षण आंदोलन की समर्थक रही। अब जब केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है तो जाट आरक्षण को लागू करने में क्या परेशानी है। उन्होंने बताया कि ''पश्चिमी उप्र में 28 जिले जाट बाहुल्य हैं। जहां पर जाटों की वोटें चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। सोचिए अगर जाट बिगड़ा तो क्या होगा''।