कर्नाटक में एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ गई है।
नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की सरकार बने हुए करीब एक महीने होने जा रहे हैं। लेकिन, वहां राजनीतिक हलचल अब भी जारी है। आलम यह है कि सरकार गठन से लेकर अब तक किसी न किसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद बना ही रह रहा है। पहले विभाग को लेकर, फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर और अब बजट को लेकर दोनों ही पार्टियों के बीच मतभेद जारी है। इसी मतभेद को खत्म करने के लिए दोनों ही पार्टियों ने रविवार को अचानक बैठक बुलाई है।
बैठक में लिया जा सकता है अहम फैसला
कयास लगाया जा रहा है कि इस बैठक का मकसद दोनों ही पार्टियों के बीच मतभेद खत्म करना है। इसके अलावा इस बैठक में न्यूनतम साझा कार्यक्रम को भी आखिरी शक्ल दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में दोनों पार्टियों के बीच तकरार के अलावा साझा न्यूनतम कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने पर बातचीत हो सकती है। गौरतलब है कि समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक कर्नाटक में दो जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से एक दिन पहले बुलाई गई है। इस समिति के संयोजक और जेडीएस महासचिव कुंवर दानिश अली ने बताया कि एक जुलाई को बैठक बुलाई गई है, जिसमें साझा न्यूनतम कार्यक्रम को अंतिम रूप देने पर बातचीत होगी। गौरतलब है कि सिद्धरमैया ने अभी हाल ही में कहा था कि गठबंधन में आये तनाव के चलते उन्हें संदेह है कि यह सरकार शायद ही अपना कार्यकाल पूरा कर पाए। सिद्धरमैया ने कहा था कि गठबंधन की सरकार तब तक रहेगी जब तक संसदीय चुनाव पूरे नहीं हो जाते। उसके बाद सभी घटनाक्रम होंगे।
यहां आपको यह भी बता दें कि जेडीएस के सुप्रीमो एच.डी. देवेगौड़ा ने भी बजट पर कांग्रेस की राय को सिरे से ठुकरा दिया और कहा कि राज्य में पूर्ण बजट पेश करने की जरूरत है। अब देखना यह है कि इस बैठक में कोई निर्णय निकल पाता है या फिर आपसी मतभेद जारी रहती है।