
श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर में राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने बुधवार को विधानसभा को निलंबित कर दिया है। जम्मू एवं कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने के बाद वोहरा ने संविधान के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा को भंग करने की मांग की थी, ताकि राज्य में चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हो सके। भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को अचानक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से नाता तोड़ लिया और वह सत्ताधारी पीडीपी-भाजपा गठबंधन से बाहर निकल गई। इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस्तीफा दे दिया, और राज्य सरकार गिर गई।
राज्य में राज्यपाल शासन लागू
जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है। राज्यपाल शासन लागू होने के बाद गर्वनर एनएन वोहरा ने राज्य के प्रशासनिक और सुरक्षा बल अधिकारियों की बैठक बुलाई। राज्यपाल वोहरा ने अधिकारियों से राज्य के ताजा हालात का जायजा लिया। बता दें कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की मंजूरी के बाद जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को राज्यपाल शासन लागू हो गया। भाजपा के पीपुल्स पीडीपी से गठबंधन तोड़ने के फैसले के बाद व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने मंगलवार को कोविंद की मंजूरी मांगी। वोहरा जम्मू एवं कश्मीर के संविधान के प्रावधानों के तहत राज्यपाल शासन को लागू करने की सिफारिश की, जो राज्य में छह महीने तक राज्यपाल शासन रहने की मंजूरी देता है। भाजपा और पीडीपी गठबंधन टूट गया है। भाजपा ने महबूबा पर कई आरोप लगाते हुए समर्थन वापस ले लिया जिसके बाद से महबूबा सरकार गिर गई। बता दें कि साढ़े तीन वर्ष बाद दोनों के बीच यह गठबंधन खत्म हुआ है।
किसी भी दल ने नहीं किया सरकार बनाने का दावा पेश
सरकार गिरने के बाद वहां किसी भी दल ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से मिलकर राज्यपाल शासन और जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की। वहीं कांग्रेस ने किसी के साथ गठबंधन नहीं करने की बात कही।