
जयपुर/ नई दिल्ली।
जम्मू-कश्मीर में इन दिनों सियासी भूचाल आया हुआ है। भाजपा-पीडीपी के बीच हुए 'ब्रेक-अप' के बाद वहां राज्यपाल शासन लागू हो गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाने की राज्यपाल एनएन वोहरा की सिफारिश को मंजूर कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में बुधवार को बताया गया कि राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने की सिपारिश को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लागू हो गया है।
इस बीच राज्यपाल एनएन वोहरा के कार्यकाल ख़त्म होने का भी काउंटडाउन शुरू हो गया है। हालांकि अमरनाथ यात्रा को देखते हुए राज्यपाल बदले जाने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक़ यात्रा को देखते हुए वोहरा को अभी तीन महीने का एक्सटेंशन और मिल सकता है। गौरतलब है कि वोहरा श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के चेयरमेन भी हैं।
लेकिन राज्यपाल वोहरा का सेवाकाल ख़त्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर का नया राज्यपाल कौन होगा, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चर्चाओं में जो नाम उभरकर सामने आ रहे हैं उनमें राजस्थान कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी राजीव महर्षि का नाम भी शामिल है।
कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं महर्षि
राजीव महर्षि फिलहाल भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा संयुक्त राष्ट्र में बॉर्ड ऑफ ऑडिटर के अध्यक्ष हैं। वे पूर्व में भारत के गृह सचिव और भारत के वित्त सचिव रह चुके हैं। वे 1978 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अपने 40 दशक के सेवाकाल में महर्षि ने राजस्थान सरकार में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में प्रशासनिक अफसरों के मुखिया यानी चीफ सेक्रेटरी की ज़िम्मेदारी भी संभाली हुई है। संभावना जताई जा रही है कि महर्षि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बनाये जा सकते हैं।
ये भी हैं राज्यपाल पद के संभावित दावेदार
महर्षि के अलावा लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैय्यद अता हसनैन का नाम भी लिया जा रहा है। हसनैन ने 2010-11 में जम्मू-कश्मीर में जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में ऑपरेशन सद्भावना को लीड किया था, जिससे घाटी में शांति लाने में कामयाबी मिली थी। इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा को भी जम्मू-कश्मीर के नए गवर्नर की दौड़ में शामिल बताया जा रहा है। पूर्व खुफिया ब्यूरो (आईबी) प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को जम्मू-कश्मीर में लोगों के सभी वर्गों के साथ बातचीत करने के लिए सरकार के विशेष प्रतिनिधि के तौर पर नियुक्त किया गया था। वे केरल काडर के 1979-बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे 2 साल की अवधि के लिए आईबी का निदेशक भी रह चुके हैं। शर्मा ने पहले आईबी प्रमुख के रूप में अजीत डोभाल के साथ काम किया था। वहीँ एक और नाम रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत का भी सामने आ रहा है।
इसलिए गरमाई हुई है जम्मू-कश्मीर में सियासत
भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को राज्य की गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वोहरा ने इस घटनाक्रम के मद्देनजर राज्य में राज्यपाल शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति को अपनी सिफारिश भेज दी थी जो मंगलवार रात गृह मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजी गई थी। राष्ट्रपति वर्तमान समय में सूरीनाम की यात्रा पर हैं और उन्होंने वही पर इस सिफारिश को स्वीकार किया।
भाजपा और पीडीपी ने तीन साल पहले राज्य में गठबंधन सरकार बनाई थी। भाजपा ने मंगलवार को यह कहते हुए गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था कि मुख्यमंत्री राज्य के बिगड़ते हालातों को काबू करने में विफल रही हैं और जिन उद्देश्यों को लेकर वह सरकार में शामिल हुई थी वे पूरे नहीं हुए हैं। इसलिए अब उसका सरकार में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
Updated on:
20 Jun 2018 01:22 pm
Published on:
20 Jun 2018 01:21 pm
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