रावत ने कहा कि अगले सप्ताह चुनाव कराने के संबंध में सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार करेंगे।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने के बाद से सियासी उठापटक के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने शुक्रवार को एक बड़ी बात कही है। रावत ने कहा कि अगले सप्ताह चुनाव कराने के संबंध में सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग होने की जानकारी उसे 21 नवंबर को मिली थी। अब चुनाव आयोग इस मामले से सभी तथ्यों को जमा करेगी और विचार करेगी कि क्या अगले हफ्ते चुनाव कराना संभव है या नहीं। रावत ने आगे कहा कि जब भी इस तरह का कोई विधानसभा भंग जैसा मामला होता है, सुप्रीम कोर्ट शासन करती है। आयोग को सबसे पहले चुनाव कराने चाहिए, नहीं तो फिर 6 महीने का लंबा इंतजार करना होगा। चुनाव की तैयारियों के लिए 6 महीने का समय पर्याप्त है। इसके अलावे जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति को भी ध्यान में रखा जाएगा।
बुधवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा को किया गया था भंग
आपको बता दें कि बुधवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा को भंग करने की घोषणा की थी। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर की सियासत से लेकर देश की दिल्ली की राजनीति गरमा गई। विपक्ष मोदी सरकर पर हमलावर हो गई और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा दिया। विपक्ष का कहना था कि मोदी सरकार चाहती है कि केवल उन्ही का शासन हो। उनका नहीं तो फिर किसी का नहीं। दरअसल यह खबर सामने आई थी कि पीडीपी, एनसी और कांग्रेस मिलकर राज्य में सरकार बनाने जा रही है। इससे पहले की इन तीनों के गठबंधन की सरकार बनती उससे पहले राज्यपाल ने विधानसभा को भंग कर दिया। हालांकि राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत ही फैसला लिया है। दूसरी बात पांच महीनों तक किसी ने भी सरकार बनाने का दावा नहीं किया। लिहाजा अब समय आ गया था कि विधानसभा को भंग कर दिया जाए और चुनाव कराए जाएं। फिलहाल इस मामले को लेकर अब राजनीति एक बार फिर से गरमा गई है।