
बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को डोसा खिलाया गया। एक रेस्टोरेंट ने मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त में डोसा पड़ोसा। नरुपथुंगा रोड स्थित एक भोजनालय अन्य मतदाताओं को भी उनकी अंगुलियों पर स्याही की निशान देखकर मुफ्त में काफी बांट रहा था। कर्नाटक में 5.06 करोड़ मतदाताओं में पहली बार मतदान करने का अधिकार पाने वाले 18 से 19 साल के मतदाताओं की संख्या 15.42 लाख है।
पहली बार राज्य में पिंक बूथ की व्यवस्था
वहीं चुनाव के दौरान महिलाओं का पिंक बूथ भी देखने को मिला। महिलाओं के लिए पिंक बूथ बनाए गए। बता दें कि चुनाव आयोग की तरफ से एक या दो नहीं, बल्कि राज्यभर में करीब 450 पिंक बूथ बनावाए गए थे। इन बूथ को 'पिंक पोलिंग स्टेशन' नाम दिया गया। पिंक बूथ महिलाओं के लिए खासतौर पर स्थापित किए गए इस पिंक बूथ पर चुनाव अधिकारी से लेकर सुरक्षा अधिकारी तक सिर्फ महिलाएं की तैनाती होती है। हालांकि ये बूथ महिलाओं के लिए गए बनाए गए हैं, लेकिन पुरुष वोटर भी यहां जाकर वोट डाल सकते हैं। इन बूथों में मौजूद हर चीज जैसे कि कपड़ा, टेबल क्लॉथ, गुब्बारे आदि का रंग गुलाबी ही होता है। बच्चों के खेलने के लिए भी यहां एक जगह मुहैया कराई गई है जिसका रंग भी गुलाबी होता है। बता दें कि किसी भी राज्य में आज तक इतने पिंक बूथ एक साथ नहीं बनवाए गए हैं।
कुछ लोगों ने किया मतदान का बहिष्कार
मतदान केंद्रों से बाहर निकलते समय कई मतदाताओं ने अपनी तर्जनी (अंगुली) पर लगी स्याही की निशान के साथ सेल्फी ली। अस्पतालाओं में भर्ती मरीज भी रोगीवाहन से मतदान केंद्र पहुंचकर अपना मतदान किया। धूप व गर्मी की परवाह किए बगैर मतदाता कतारों में लगे थे। बेलागवी, मडिकेरी और धारवाड़ जिलों में दुल्हनों ने भी शादी में जाने से पहले मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डाले। इस बीच बेंगलुरु से 630 किलोमीटर दूर कलबुर्गी में सैकड़ों गांववासियों ने इलाके में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के विरोध में मतदान का विरोध किया।