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जानिए, कौन हैं नागपुर में प्रणब मुखर्जी के साथ सीट शेयर करने वाले सिख स्‍वयंसेवक?

संघ मुख्‍यालय में गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान सिख स्‍वयंसेवक को विशेष स्‍थान दिया गया।
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Updated: 8 Jun 2018, 2:26 PM IST
sikh swamsewak
जानिए, कौन हैं नागपुर में प्रणब मुखर्जी के साथ सीट शेयर करने वाले सिख स्‍वयंसेवक?

नई दिल्ली। गुरुवार को संघ मुख्‍यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दुनिया भर के लोगों की नजरें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ सीट शेयर करने वाले सिख स्‍वयंसेवक पर टिकी थीं। टीवी पर इस कार्यक्रम को देख रहे लोग इस बात को जानना चाहते थे कि आखिर संघ के वरिष्‍ठ पदाधिकारियों के बदले सिख स्‍वयंसेवक को क्‍यों बैठाया गया? आपको बता दें कि उस शख्स का नाम है सरदार गजेंद्र सिंह है। वह उत्तराखंड के प्रांतीय संघचालक सर्व शिक्षा वर्ग के सर्वाधिकारी हैं।

खास पल बना सिख स्‍वयंसेवक की उपस्थिति
सिख स्‍वयंसेवक को एक सर्वाधिकारी के रूप में नागपुर में तृतीय वर्ष समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बैठाया गया था। यानी उस समय सिख स्‍वयंसेवक भागवत का प्रतिनिधित्‍व कर रहे थे। यही कारण है कि भागवत और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के साथ मंच पर उनकी उपस्थिति को बहुत खास स्‍थान दिया गया था। चूंकि मोहन भागवत प्रणब की आगवानी में व्‍यस्‍त थे इसलिए उनका हर पल प्रतिनिधित्‍व करने के लिए एक स्‍वयंसेवक को बैठाया गया था। इस बारे में सिख स्वयंसेवक ने कहा कि यह संघ के समावेशी चरित्र का हिस्सा है और साथ ही साथ एक खास पल भी।

सिख समाज के लिए गर्व की बात
राष्ट्रीय सिख संगत के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीएस गिल ने इस बारे में कहा कि संघ ने हमेशा सिखों को संगठन का हिस्सा माना है। हमने गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं और अब गुरु नानक की 550वीं जयंती की तैयारी कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने हमारे गुरु नानक और उनके आदर्शों के बारे में भी बात की है। इसलिए गजेंद्र सिंह वर्ग में संघचालक का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्‍हें जो सम्‍मान दिया गया है वो पूरे सिख समाज के लिए सम्‍मान की बात है। सिखों को संघ में हमेशा से विशेष स्‍थान दिया जाता रहा है। पहले भी सिख सदस्यों ने नेतृत्व की भूमिका निभाई है।

कौन है सिख स्‍वयंसेवक?
आपको बता दें कि गजेंद्र सिंह नैनीताल हाईकोर्ट में अतिरिक्त वकील हैं। वह दशकों से संघ से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जिला, विभाग और सह-संचालक प्रांत में सेवा की है। प्रांत संघचालक बनने से पहले वह राष्ट्रीय सिख संगत के राष्ट्रीय महासचिव थे। संघ में बौद्धिक, सेवा, स्वास्थ्य और शारीरिक विकास जैसे कई विभाग हैं। शारीरिक गतिविधि में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। वह परेड और व्यायाम करने के लिए जाने जाते हैं। उनके सिख सहयोगियों ने शारीरिक विकास में उनके काम के लिए उन पर भरोसा किया है।

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