अब दो साल बीतने के बाद प्रभावित लोगों की मदद के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने एक योजना का ऐलान किया है।
नई दिल्ली। बिहार में शराबबंदी के दो साल पूरे हो गए हैं। 2016 में लागू हुए इस नियम के कारण राज्य में शराब पर तो रोक लगी थी, लेकिन इसके साथ ही इससे जुड़े कई लोगों की आजीविका या यूं कहें कि कमाई के साधन भी बंद हो गए। अब दो साल बीतने के बाद प्रभावित लोगों की मदद के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने एक योजना का ऐलान किया है। जिसके तहत वहां के देशी शराब और ताड़ी उत्पादन एवं बिक्री के व्यवसाय में पारंपरिक रूप से जुड़े बेहद गरीब परिवारों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं अन्य समुदाय के जीवन को वापस पटरी लाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए 'सतत जीविकोपार्जन' नाम की नई योजना को मंजूरी दी गई है।
योजना पर होगा करीब 840 करोड़ की अनुमानित राशि का खर्च
जानकारी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत ऐसे गरीब परिवार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति एवं अन्य समुदाय के परिवारो, जो शराब और ताड़ी के उत्पादन एवं बिक्री में पारंपरिक रूप से जुड़े थे, उनकी पहचान कर उन्हें आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि ये मदद कर्ज अथवा सब्सिडी के रूप में होगी और आने वाले तीन सालों में सरकार इस योजना पर करीब 840 करोड़ की अनुमानित राशि खर्च करेगी।
एक लाख परिवार होंगे शामिल
इस योजना से जुड़े पहलुओं पर चर्चा के लिए एक बैठक भी की गई। मंत्रिमंडल की इस बैठक के बाद ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अरविंद कुमार ने जानकारी दी कि इस योजना में मुख्यतः वैकल्पिक रोजगार पैदा करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का एकमात्र मकसद हाशिये पर खड़े ऐसे लोगों की विकास में मदद करते हुए उन्हें समाज के साथ-साथ कदम मिलाने के काबिल बनाना है। फिलहाल अनुमान है कि इस योजना में एक लाख परिवार शामिल किए जाएंगे, जिन लोगों के विकास सुनिश्चित करने के लिए माइक्रो प्लानिंग की जाएगी।
इस तरह होगा लोगों का चयन
किन परिवारों को इस योजना में शामिल किया जाएगा यह सुनिश्चित करने के लिए ग्राम संगठन का सहयोग लिया जाएगा। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही परिवारों को रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल बताया जा रहा है कि प्रत्येक परिवार को करीब साठ हजार रुपये दिए जाएंगे।