12 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भाजपा का विस्तार मॉडलः दूसरे दलों से आए नेताओं ने खिलाया कमल, बने मुख्यमंत्री

पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले ने भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक रणनीति को फिर स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि कोई नेता नए क्षेत्रों में भाजपा को सफलता दिलाने की क्षमता रखता है, तो उसके पुराने राजनीतिक दल की पृष्ठभूमि को बाधा नहीं माना जाएगा। बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा अब उन राज्यों में, जहां उसका संगठन लंबे समय से सक्रिय होने के बावजूद सत्ता तक नहीं पहुंच पाया था, वहां दूसरे दलों से आए प्रभावशाली नेताओं को आगे बढ़ाकर विस्तार की नीति पर काम कर रही है।

3 min read
Google source verification
Rajasthan BJP Prepares Political Appointment

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले ने भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक रणनीति को फिर स्पष्ट कर दिया है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि कोई नेता नए क्षेत्रों में भाजपा को सफलता दिलाने की क्षमता रखता है, तो उसके पुराने राजनीतिक दल की पृष्ठभूमि को बाधा नहीं माना जाएगा। बिहार में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

भाजपा अब उन राज्यों में, जहां उसका संगठन लंबे समय से सक्रिय होने के बावजूद सत्ता तक नहीं पहुंच पाया था, वहां दूसरे दलों से आए प्रभावशाली नेताओं को आगे बढ़ाकर विस्तार की नीति पर काम कर रही है। पार्टी यह संदेश भी देना चाहती है कि भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं को केवल राजनीतिक आश्रय ही नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी भी मिल सकती है। पंजाब, झारखंड और दक्षिण भारत के राज्यों के लिए इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

शुभेंदु अधिकारी- पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी भाजपा की इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरे हैं। कभी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेंदु ने 2020 में भाजपा का दामन थामा था। 2007 में नंदीग्राम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे अधिकारी ने भाजपा को बंगाल में सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ममता बनर्जी को दो बार चुनावी मात देने वाले शुभेंदु को भाजपा ने राज्य की अपनी पहली सरकार का नेतृत्व सौंपकर बड़ा संदेश दिया है।

सम्राट चौधरी- बिहार

बिहार में सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना भी भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना गया। 2017 में भाजपा में शामिल होने से पहले वे राजद और जदयू में सक्रिय रहे। भाजपा के पास बिहार में लंबे समय से मजबूत संगठन और पुराने नेताओं की बड़ी पंक्ति होने के बावजूद पार्टी ने सम्राट पर भरोसा जताया। इसके पीछे बिहार के लव-कुश सामाजिक समीकरण के साथ-साथ नए नेताओं को अवसर देने का संदेश भी माना गया।

हिमंता बिस्व सरमा- असम

असम में हिमंता बिस्व सरमा भाजपा के सबसे सफल नेताओं में गिने जाते हैं। कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हिमंता ने 2015 में भाजपा ज्वाइन की थी। 2016 में भाजपा सरकार बनने के बाद पहले सर्बानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन 2021 में पार्टी ने हिमंता को कमान सौंप दी। अब लगातार तीसरी बार सरकार बनने पर भी पार्टी ने उन्हीं पर भरोसा कायम रखा है। वे मंगलवार को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

पेमा खांडू- अरूणाचल प्रदेश

अरूणाचल प्रदेश में 2016 में कांग्रेस के 44 में 43 विधायकों ने तत्कालीन सीएम पेमा खांडू के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन की पीपुल्स पार्टी ऑफ अरूणाचल (पीपीए) ज्वाइन कर ली। दो महीने बाद खांडू पीपीए को विभाजित करते हुए 32 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद से ही अरूणाचल प्रदेश में पेमा खांडू सीएम हैं और भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।

एन. बीरेन सिंह - मणिपुर

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह कांग्रेस के नेता और प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हैं। सिंह 2016 में भाजपा में आए। 2017 में भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनाते हुए सिंह को मुख्यमंत्री बनाया।

मानिक साहा- त्रिपुरा

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी कांग्रेस की पृष्ठभूमि के रहे हैं। साहा 2016 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और भाजपा की प्रदेश इकाई के 2020 से लेकर 2022 तक अध्यक्ष रहे। 2022 में विधायक निर्वाचित होने के बाद पार्टी ने उन्हें उसी वर्ष मुख्यमंत्री विप्लव देव के स्थान पर मुख्यमंत्री बनाया।

अब भाजपा की नजर पंजाब, झारखंड और दक्षिण भारत पर है। पंजाब में कैप्टन अमरेंद्र सिंह, सुनील जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे कांग्रेस के नेता पहले ही भाजपा के प्रमुख चेहरे हैं। आप से हाल ही शामिल हुए राघव चड्ढा, संदीप पाठक पर भी निगाहें टिकी हैं। वहीं दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में भी पार्टी अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़कर राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में है