जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुई आतंकी हमला हमले के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 4 अलगाववादी नेताओं के बाद अब हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटाने का फैसला लिया है।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुई आतंकी हमला हमले के बाद मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 4 अलगाववादी नेताओं के बाद अब हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटाने का फैसला लिया है। सरकार ने इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के 155 अन्य नेताओं की सुरक्षा में बड़ा फेरबदल किया है। इसको लेकर गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई एडवाइजरी के बाद सभी 22 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा हटा ली गई है। आपको बता दें कि इससे पहले सरकार ने चार अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटाने का फैसला लिया था। इन नेताओं में मीरवाइज उमर फारूक, बिलाल लोन, शब्बीर शाह और अब्दुल गनी बट्ट के नाम शामिल थे।
इन नेताओं की हटाई गई सुरक्षा—
एसएएस गिलानी, मुख्तार अहमद वाजा, फारूक अहमद किचलू, मसरूर अब्बास अंसारी, सलीम गिलानी, शहीद उल इस्लाम, आगा सैयद अबुल हुसैन, यासीन मलिक, जफर अकबर भट, नईम अहमद खान, अब्दुल गनी शाह, आगा सैयद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी और मोहम्मद मुसद्दिक भट शामिल हैं।
155 अन्य नेताओं की सुरक्षा में फेरबदल
सरकार ने इसके साथ ही अन्य 155 नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने इन नेताओ को खतरे के आकलन और उनकी गतिविधियों के बेस पर सुरक्षा दी थी। इन नेताओं में आईएएस से इस्तीफा देकर नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले शाह फैसल भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार इन हुर्रियत नेताओं समेत अन्य नेताओं की सुरक्षा में 1000 से अधिक सुरक्षाकर्मी और 100 से अधिक सरकारी गाड़ियां को लगाया था। गृह मंत्रालय के फैसले के बाद सभी गाड़ियों को वापस ले लिया गया है।
आपको बता दें पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले में 44 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश—ए—मोहम्मद ने ली थी। वहीं, इस घटना को लेकर देश भर में भारी आक्रोश है। लोग देश के जवानों की शहादत का बदला चाहते हैं। हालांकि सरकार ने भी विश्व जगत के सामने पाकिस्तान को अलग—थलग करने का प्रयास शुरू कर दिया है।