कहा जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने का निर्णय एक दिन पहले ही यानी मंगलवार को ले लिया गया था, लेकिन इसका ऐलान बुधवार को किया गया, क्योंकि मंगलवार को पूरी प्रक्रिया खत्म की गई।
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में मचे सियासी घमासान के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक की सियासत में हलचलें पैदा हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि इन सबके बीच ये तो तय माना जा रहा है कि अब राज्य में नई सरकार का गठन नए सिरे से चुनाव कराकर ही होगा। इसी पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। ये मुलाकात बुधवार को हुई।
राज्यपाल के फैसले पर केंद्र सरकार की सफाई
जम्मू-कश्मीर में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल पर केंद्र सरकार की तरफ से भी बयान आया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि राज्यपाल सत्यपाल मलिक के द्वारा विधानसभा को भंग करने का फैसला किसी दबाव के चलते नहीं लिया गया है। आपको बता दें कि सत्यपाल मलिक के इस फैसले के बाद से ही केंद्र सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जैसे ही जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-NC-कांग्रेस के सरकार बनाने की गतिविधियां शुरू हुई, उसी के दबाव में केंद्र सरकार ने राज्यपाल के हाथों विधानसभा को भंग करवा दिया।
2019 के लोकसभा चुनाव के साथ हो सकते हैं विधानसभा चुनाव
राजनाथ सिंह और पीएम मोदी के बीच हुई मुलाकात में राज्य के हालातों को लेकर चर्चा हुई है। अब माना ये जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल द्वारा जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने का निर्णय एक दिन पहले ही यानी मंगलवार को ले लिया गया था, लेकिन इसका ऐलान बुधवार को किया गया, क्योंकि मंगलवार को पूरी प्रक्रिया खत्म की गई।
राज्यपाल ने खरीद-फरोख्त की जताई आशंका
विधानसभा को भंग करने के फैसले पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी इस पर सफाई दी है। सत्यपाल मलिक ने कहा है कि राज्य में सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त की जा रही थी, इसीलिए उन्हें ये फैसला लेना पड़ा। राज्यपाल ने कहा था कि उन्हें आशंका थी कि सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त हो सकती है, इसलिए उन्हें ये फैसला लेना पड़ा। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें महबूबा मुफ्ती या सज्जाद लोन की ओर से कोई खत नहीं मिला।