द्रमुक प्रमुख एम. के. स्टालिन ने मोदी सरकार को चुनावी तानाशाह बताया है।
नई दिल्ली। द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने शनिवार को कहा कि पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ 18 सितंबर को विभिन्न जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पार्टी जिला सचिवों और विधायकों की एक बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए स्टालिन ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन अन्नाद्रमुक सरकार के 'कुशासन' के खिलाफ किया जाएगा।
18 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला
स्टालिन ने कहा कि द्रमुक की मांग गुटखा घोटाले में दागी स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टी.के. राजेंद्रन को बर्खास्त करने की है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें राज्य सरकार से कैबिनेट की बैठक बुलाकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सात दोषियों को रिहा करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया गया है। द्रमुक अध्यक्ष ने कहा कि राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस प्रस्ताव के आधार पर सातों दोषियों को रिहा करने का तुरंत आदेश देना चाहिए।
मोदी सरकार को बताया चुनावी तानाशाही
वहीं, बैठक में उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वे चुनावी तानाशाही करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने बीजेपी के भगवाकरण के सपनों को तोड़ने का प्रण लिया है। स्टालिन ने कहा कि हमारी पार्टी संवैधानिक मूल्यों का बरकरार रखने के लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार है।
स्टालिन को 28 अगस्त को बनाया गया था अध्यक्ष
बता दें कि स्टालिन को 28 अगस्त को पार्टी प्रमुख बनाया गया है। इसके बाद उन्हेंने पहली बैठक की । बैठक के दौरान उन्होंने नोटबंदी, राफेल सौदे, नीट और मौजूदा आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे पर केन्द्र की आलोचना की। वहीं, बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, बीजेपी सरकार तमिलनाडु के हितों की अनदेखी कर रही है, बहुसंख्यकों को प्रभावित और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है।