राजनीति

शशि थरूर के राम मंदिर वाले बयान पर बीजेपी हमलावर, स्वामी ने कहा- उसके बारे में क्या बोलें

थरूर ने कहा कि अच्छे हिंदू अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहते। क्योंकि अच्छे हिंदू किसी दूसरे के पूजास्थल को तोड़ना नहीं चाहते हैं।
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Updated: 15 Oct 2018, 4:17 PM IST
Subramanian Swamy
शशि थरूर के राम मंदिर वाले बयान पर बीजेपी हमलावर, स्वामी ने बताया 'नीच आदमी'

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीति बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट भी इसी महीने के आखिरी में देश के सबसे चर्चित मामले पर सुनवाई करने वाला है। इस बीच राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने राम मंदिर को पर बड़ा बयान दिया है। थरूर ने कहा कि अच्छे हिंदू अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं चाहते। क्योंकि अच्छे हिंदू किसी दूसरे के पूजास्थल को तोड़ना नहीं चाहते हैं। थरूर के बयान पर कांग्रेस की ओर से तोो कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन बीजेपी ने जमकर हमला शुरु कर दिया है।

स्वामी बोले- वे नीच आदमी है

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने थरूर के बयान पर कहा कि उनके खिलाफ तो पहले से चार्जशीट है। हम ऐसे व्यक्ति के बयान पर क्या कह सकते हैं। वो एक नीच आदमी है। वहीं बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा ने कहा कि कांग्रेस के नेता बार-बार ऐसा बयान इसलिए दे रहे हैं कि अयोध्या में मंदिर नहीं बने। इससे साफ होता है कि कांग्रेस नेता जानबूझ कर एक समुदाय को संदेश देना चाहते हैं राम मंदिर नही बनने देंगे

शशि थरूर ने राम मंदिर पर क्या कहा था?

चेन्नई में चल रहे द हिंदू लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को शशि थरूर ने कृष्णगोपाल गांधी के साथ बातचीत के दौरान कहा कि कोई भी हिंदू ये नहीं चाहेगा कि किसी दूसरे धर्म के ढांचे को गिराकर उसी स्थान पर राम मंदिर बनाया जाए। इस कार्यक्रम में वैसे तो थरूर ने #MeToo मूमेंट समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी लेकिन राजनीतिक लिहाज से राम मंदिर पर उनका बयान तेजी से मीडिया की सुर्खियों में आ गया।

फंसे तो दी सफाई
शशि थरूर के बयान पर जब विवाद शुरू हुआ तो उन्होंने सफाई भी दे दी। थरूर ने ट्वीट कर कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। वैसे भी वे मेरा व्यक्तिगत बयान था। मैं अपनी पार्टी की प्रवक्ता नहीं हूं इसलिए इसे पार्टी से न जोड़ा जाए।

29 अक्टूबर से होगी विवादास्पद भूमि पर सुनवाई

बता दें कि 27 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने 2-1 के बहुमत से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने की याचिका खारिज कर दी और निर्णय लिया कि गठित होने वाली नई तीन सदस्यीय पीठ 29 अक्टूबर से मामले की सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने खुद और तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से फैसले को पढ़ते हुए कहा कि मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजे जाने का कोई मामला नहीं बनता। न्यायाधीशों के बहुमत के फैसले में कहा गया कि नई गठित की जाने वाली पीठ 29 अक्टूबर से हिंदू व मुस्लिम हितधारकों की ओर से पेश याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इन याचिकाओं के माध्यम से 2010 के फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें विवादास्पद स्थल को तीन भागों राम लला, निर्मोही अखाड़ा और मुस्लिम पक्षकार के बीच बांटने का फैसला सुनाया गया था।

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