
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों और जरूरत पड़ी तो दो साल बाद भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन का अंतिम लक्ष्य भारत में लोकतंत्र की बहाली है। राहुल ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के प्रति पूरा सम्मान है, लेकिन संस्थाएं भूमिका निभाएं या नहीं, राजनीतिक और जनता का प्रतिरोध जारी रहेगा।
राहुल के आवास पर इंडिया ब्लॉक के सांसदों व सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों की टी-पार्टी रखी गई। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मीडिया से बातचीत में राहुल ने कहा कि यह अलग-अलग विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक साझा आंदोलन है। इसका एक ही लक्ष्य है कि भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करना। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र और चुनाव व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया है तथा संविधान को दरकिनार किया जा रहा है।
राहुल ने आंदोलन की आगे की रणनीति का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि वे यह नहीं बता सकते कि आगे कैसे लड़ेंगे, क्योंकि इससे सब कुछ पहले ही सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस ऊर्जा, एकजुटता और ताकत के साथ विपक्षी दलों ने लोगों को एकजुट किया है, उसी तरह आगे भी मिलकर संघर्ष किया जाएगा। राहुल ने दावा किया कि यह केवल राजनीतिक दलों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आम और गैर-राजनीतिक नागरिकों ने भी इसमें भागीदारी की।
राहुल ने कहा कि जंतर-मंतर लोकतांत्रिक भावनाएं व्यक्त करने का माध्यम रहा है, लेकिन अब सरकार ने वहां प्रदर्शन की गुंजाइश सीमित कर दी है। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट चोरी का मुख्य योजनाकार, गृह मंत्री अमित शाह को इसे लागू करने वाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित अन्य लोगों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन लोगों को समझना चाहिए कि उनके खिलाफ घेरा कस रहा है और उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा।
खरगे ने कहा कि दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना अपने आप में महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा और आम लोग वोट चोरी के मुद्दे पर सामने आए हैं। खरगे ने कहा कि आंदोलन का अगला कार्यक्रम भी घोषित किया जाएगा। -किसान, मजदूर, छात्र समेत हर वर्ग शामिल होगा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि एसआइआर के खिलाफ आंदोलन में सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, छात्र समेत हर वर्ग के लोग शामिल होंगे।