
Lok Sabha Productivity Report : सोशल मीडिया पर अक्सर क्षेत्र में ना जाने वाले सांसदों के लापता पोस्टर आते हैं। इतना ही नहीं पहली लोकसभा में सांसद 135 दिन तक संसद में रहते थे ये साल दर साल घटकर मोदी काल में 55 दिनों पर आ गई है।
आंकड़े बता रहे हैं कि सिर्फ एक सांसद अपने 5 साल के कार्यकाल में एक साल से भी कम समय (274 दिन) संसद में काम करता है। ये सब सदन में आने पर दिखता है लेकिन, सदन के बाहर ये पांच में अपने क्षेत्र में कब और कितनी देर के लिए गए। इसके बारे में ना कोई ठोस सिस्टम बना है जिससे ये ट्रैक किया जा सके।
फिर भी सांसद महोदय को सैलरी पूरी मिलती है। चलिए, सांसद महोदय की ड्यूटी और सैलरी का कैलकुलेशन विस्तार से समझते हैं-
PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार पहली लोकसभा (1952-57) में संसद हर साल औसतन 135 दिन चलती थी। 17वीं लोकसभा (2019-2024) में यह घटकर औसतन सिर्फ 55 दिन प्रति वर्ष रह गया है। यह किसी भी पूरा कार्यकाल पूरा करने वाली लोकसभा में सबसे कम है। पूरे 5 साल में लोकसभा की कुल 274 बैठकें हुईं।
तुलना के लिए, 16वीं लोकसभा में यह औसत 66 दिन/वर्ष और 15वीं-14वीं लोकसभा में क्रमशः 332 व 356 कुल बैठकें थीं। यानी गिरावट का ट्रेंड लगातार जारी है।
संसदीय कार्य मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2023 से कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर सांसदों के वेतन में करीब 24% बढ़ोतरी को नोटिफाई किया, जो मार्च 2025 में गजट के जरिए औपचारिक हुई। मौजूदा दरें इस प्रकार हैं:
| पुरानी दर (2018) | नई दर (अप्रैल 2023 से) |
|---|---|
| बेसिक सैलरी: ₹1,00,000/माह | बेसिक सैलरी: ₹1,24,000/माह |
| क्षेत्रीय भत्ता: ₹70,000/माह | क्षेत्रीय भत्ता: ₹87,000/माह |
| कार्यालय व्यय भत्ता: ₹60,000/माह | कार्यालय व्यय भत्ता: ₹75,000/माह |
| दैनिक भत्ता (सत्र/समिति): ₹2,000/दिन | दैनिक भत्ता (सत्र/समिति): ₹2,500/दिन |
| पेंशन (सेवानिवृत्त सांसद): ₹25,000/माह | पेंशन (सेवानिवृत्त सांसद): ₹31,000/माह |
फिक्स्ड मासिक आय (सदन चले या न चले)
1,24,000 + 87,000 + 75,000 = ₹2,86,000 प्रति माह
5 साल (60 महीने) में:
2,86,000 × 60 = ₹1,71,60,000 (₹1.72 करोड़)
दैनिक भत्ता
सदन की 274 बैठकों के अलावा सांसद संसदीय समितियों और अन्य आधिकारिक बैठकों में भी हाजिरी लगाते हैं। इन्हें मिलाकर अनुमानित कुल हाजिरी वाले दिन करीब 400 मानें तो:
400 × ₹2,500 = ₹10,00,000 (₹10 लाख)
कुल अनुमानित आय (5 साल)
₹1.72 करोड़ (फिक्स्ड) + ₹0.10 करोड़ (दैनिक भत्ता) ≈ ₹1.82 करोड़
सदन की बैठकों का आंकड़ा सिर्फ लोकसभा/राज्यसभा के भीतर की कार्यवाही को दिखाता है। सत्र न चलने पर भी सांसद औपचारिक रूप से इन कामों में लगे रहते हैं:
फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि सदन के भीतर घटते कामकाजी दिन और बार-बार होने वाले हंगामे-स्थगन विधायी जवाबदेही और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
नोट: उपरोक्त आंकड़े PRS Legislative Research (Vital Stats, 17th Lok Sabha), संसदीय कार्य मंत्रालय गजट अधिसूचना (अप्रैल 2023 सैलरी संशोधन), MPLADS दिशानिर्देश (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) से लिए गए हैं।