Pratapgarh Bribery Case: पुलिस कस्टडी में मौजूद एक व्यक्ति की राहत देने के बदले रिश्वत लेने के मामले में प्रतापगढ़ जिले के धोलापानी सीआई प्रवीण चारण पर बड़ी कार्रवाई हुई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो डूंगरपुर की जांच के बाद पुलिस अधीक्षक बी आदित्य ने प्रवीण चारण को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया है।
Pratapgarh Bribery Case: पुलिस कस्टडी में मौजूद एक व्यक्ति की राहत देने के बदले रिश्वत लेने के मामले में प्रतापगढ़ जिले के धोलापानी सीआई प्रवीण चारण पर बड़ी कार्रवाई हुई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो डूंगरपुर की जांच के बाद पुलिस अधीक्षक बी आदित्य ने प्रवीण चारण को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया है। डूंगरपुर एसीबी डिप्टी रतनसिंह राजपुरोहित ने बताया कि पुलिस निरीक्षक प्रवीण चारण ने कस्टडी में मौजूद रोहित नाम के व्यक्ति के सेठ से 3 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी और उसे स्वीकार किया था।
एसीबी की कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस निरीक्षक के पास से मौके पर 2 लाख 87 हजार 150 रुपए की नकदी बरामद की गई। इसके बाद जांच दल ने ने जब आरोपी पुलिस निरीक्षक प्रवीण चारण के सरकारी आवास की तलाशी ली, तो वहां से भी सत्यापन के लिए दी गई 20 हजार की राशि में से 14 हजार रुपए मिले। इन नोटों के सीरियल नंबर सत्यापन के लिए दिए गए नोटों से मेल खा रहे हैं। जो रिश्वत के लेनदेन का पुख्ता प्रमाण है।
एसीबी ने पुलिस निरीक्षक प्रवीण चारण के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। वहीं एसीबी की ओर से इस मामले में रुपयों की बरामदगी और मौका तस्दीक की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, तथा आगे की जांच जारी है।
जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने पुलिस विभाग में अपूर्व प्रशासनिक फेरबदल किया है। उन्होंने धोलापानी और जलोदा जागीर थानों के थानाधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। यह फेरबदल हाल ही धोलापानी के तत्कालीन थानाधिकारी प्रवीणकुमार चारण के रिश्वत मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई के दौरान डिटेन होने के बाद किया गया है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी थी। एसपी बी आदित्य ने बताया कि जलोदा जागीर के थानाधिकारी पुराराम मीणा को स्थानांतरित कर धोलापानी का नया थानाधिकारी नियुक्त किया गया है। इसी क्रम में, धोलापानी के थानाधिकारी रविंद्र पाटीदार की जलोदा जागीर थानाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन तबादलों को जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पुलिस महकमे में हुए इस त्वरित फेरबदल का मुख्य उद्देश्य थानों के संचालन को सुचारु बनाए रखना और जनता के बीच पुलिस की छवि की बेहतर करना है। रिश्वतखोरी जैसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक मानी गई है।
इस संबंध में यहां पुलिस के आदेश जारी होने के बाद, संबंधित अधिकारियों को तत्काल अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कहीं भी प्रशासनिक शून्य उत्पन्न न हो। यह कदम भ्रष्टाचार के प्रति पुलिस विभाग की सख्त नीति को दर्शाता है।