पश्चिम बंगाल और झारखंड के साइबर अपराध के आरोपियों चंद्रभान यादव, मोहन कुमार मंडल और तौसीफ जमां को जमानत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया है। दाखिल जमानत अर्जी को खारिज कर दी है। याची ने साइबर ठगी करने के अपराध को स्वीकार भी किया है।गिरफ्तार आरोपियों ने मिलकर शिकायत कर्ता घनश्याम के बैंक खाते से 17 लाख रुपये धोखे से निकाल लिया है। कोर्ट
प्रयागराज: यूपी के साथ ही देश के अलग-अलग प्रदेशों में साइबर अपराध तेजी के साथ बढ़ा है। साइबर अपराध करने में शामिल आरोपियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त कदम उठाया है। पश्चिम बंगाल और झारखंड के साइबर अपराध के आरोपियों चंद्रभान यादव, मोहन कुमार मंडल और तौसीफ जमां को जमानत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया है। दाखिल जमानत अर्जी को खारिज कर दी है। याची ने साइबर ठगी करने के अपराध को स्वीकार भी किया है।
गिरफ्तार आरोपियों ने मिलकर शिकायत कर्ता घनश्याम के बैंक खाते से 17 लाख रुपये धोखे से निकाल लिया है। कोर्ट ने अपराध को गंभीरता से लिया है। इनकी निशान देही पर दर्जनों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई की गिरफ्तारी के लिए छापे डालने के लिए उस राज्य की पुलिस की सहायता मांगी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने चंद्रभान सिंह यादव व दो अन्य की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।
ओटीपी बताते ही उड़ जाता है पैसा
शिकायतकर्ता ने न्यायालय को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय आयुध भंडार छिवकी नैनी का सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। वह 2019 में एफआईआर दर्ज कराया कि युनो एप के माध्यम से 17 लाख रुपये साइबर ठगों ने निकाल लिया था। ठगों ने फोनकर पूछा गया खाते में पैसे आये तो ओटीपी दें। इसके बाद कई बार पैसे कटते रहे। बैंक ने कहा नेट बैंकिंग व यूनो लाक कराए। तब तक साइबर गिरोह बैंक खाते से लगभग 17 लाख निकाल लिया था। अपराधियों ने स्वीकार किया कि कई राज्यों तक गिरोह फैला है। खाते से पैसे निकाल फर्जी खातों में जमा कर ठगी करता है।