Mahant Narendra Giri Death case. याची अधिवक्ता सहर नकवी ने कहा- लोगों का विश्वास न्यायालय में बना रहे, इसलिए मॉनटरिंग जरूरी.
प्रयागराज. Mahant Narendra Giri Death case. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि (Narendra Giri) की आत्महत्या मामले में सीबीआई जांच ने तेजी पकड़ ली है। जेल में बंद आनंद गिरि समेत तीनों आरोपियों की सीबीआई ने चार अक्टूबर तक रिमांड लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) में मामले की सीबीआई जांच कोर्ट की निगरानी में करने की अर्जी दायर की गई है। हाईकोर्ट की महिला वकील व समाजसेवी सहर नकवी की ओर से मंगलवार को यह याचिका दायर की गई है। इस मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और लोगों का विश्वास न्यायालय में बना रहे, इसलिए मामले की ज्यूडिशियल मॉनिटरिंग की मांग की गई है। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद कोर्ट में दाखिल की गई यह किसी भी तरह की पहली अर्जी है।वहीं मामले में सीबीआई टीम आरोपी आनंद गिरि को हरिद्वार ले जाकर पूछताछ कर सकती है।
कुछ करेंगे विश्वास, कुछ उठा सकते हैं सवाल-
महिला अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस व रजिस्ट्रार जनरल को एक ई-मेल के जरिए लेटर पिटिशन भेजकर मामले में दखल दिए जाने की मांग की गई। उनका मानना है कि सीबीआई दबाव में आकर मामले की जांच कर सकती है और कुछ तथ्यों को अनदेखा भी कर सकती है। सीबीआई टीम की जांच में जो भी सामने आएगा, उसपर कुछ लोग विश्वास करेंगे, तो कुछ सवाल उठा सकते हैं। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी पर देश के अधिकतर लोगों को भरोसा है, लेकिन कुछ लोगों में जांच को लेकर आशंका भी है। दिवंगत नरेंद्र गिरि के लाखों-करोड़ों अनुयायी हैं, उनकी आस्था नरेंद्र गिरि से जुड़ी थी, लेकिन जिन हालातों में उनका शव मिला, उससे कई सवाल व शक पैदा हो रहा है।
अदालतों के मंदिर में है लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था-
सहर नकवी की लेटर पिटिशन में जांच एजेंसी सीबीआई व यूपी सरकार के गृह विभाग को पक्षकार बनाया गया है। सहर नकवी का कहना है कि अदालतों पर न सिर्फ जनता भरोसा करती है बल्कि अदालतों को मंदिर में उनकी आस्था भी है। ऐसे में हाईकोर्ट अपनी निगरानी में सीबीआई जांच कराती है, तो वह समय-समय पर रिपोर्ट मांग सही दिशा निर्देश दे सकती है, जिससे लोगों का जांच में विश्वास बना रहेगा। जांच रिपोर्ट पर किसी को शक नहीं होगा। साथ ही लाखों सनातन धर्मी श्रद्धालुओं व दूसरे आस्थावान लोगों की भावनाओं को ठेस भी नहीं पहुंचेगी। तमाम श्रद्धालुओं व आम जनमानस की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह पत्र याचिका दाखिल की गई है। लेटर पिटीशन यदि मंजूर की गई तो हाईकोर्ट इस मामले में आगामी दो दिनों में फैसला ले सकती है।