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जब DGP के दफ्तर में रोई शाइस्ता परवीन, बोली- साहब! मेरे पति को बचा लीजिए

Atiq Ahmed Shaista Parveen : जब अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन 5 साल के असद को लेकर DGP दफ्तर पहुंची और फूट-फूट कर रोने लगी! पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सुनाया 2007 का वो अनसुना किस्सा

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अतीक को बचाने के लिए DGP ऑफिस में गिड़गिड़ाई थी शाइस्ता परवीन, PC- Patrika

Atiq Ahmed Shaista Parveen : साल 2007 का वक्त था…उत्तर प्रदेश में माफिया अतीक अहमद की दहशत चरम पर थी। इलाहाबाद में अतीक अहमद की तूती बोलती थी। इलाहाबाद से लेकर दिल्ली-मुंबई तक उसके नाम की धाक थी। ठीक उसी वक्त 23 जून 2007 को डॉ. विक्रम सिंह यूपी पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) बने। उन्होंने 23 सितंबर 2009 तक इस पद पर रहते हुए माफिया राज पर शिकंजा कसा।

डॉ. विक्रम सिंह ने अपने हालिया पॉडकास्ट में अतीक-अशरफ के सबसे विभत्स कांड का भी जिक्र किया। डीजीपी चार्ज संभालने के महज 2-3 दिन बाद अतीक और अशरफ ने प्रयागराज के एक मदरसे की दीवार गिराकर कब्जा करने की कोशिश की। वह लड़कियों का मदरसा था। उनके गुर्गों ने दो नाबालिग लड़कियों का अपहरण किया, नदी किनारे गैंगरेप किया और सुबह उन्हें लहूलुहान हालत में मदरसे के दरवाजे पर फेंक दिया। विक्रम सिंह ने इसे अपना ‘टेस्ट केस’ बनाया और गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई शुरू की।

डॉ. विक्रम सिंह ने बताया, 'दरअसल तब की हुकूमत माफिया अतीक अहमद को लेकर कुछ अलग ही सोचा करती थी। लेकिन, मैंने तय कर लिया था यह तो नहीं चलेगा। यह मेरे लिए 'टेस्ट केस' था। मैंने ब-मुश्किल एक महीने के भीतर ही अतीक के यहां मैंने बुलडोजर चलवा दिया था। मुकदमा उसके खिलाफ दर्ज कराया सो अलग। मैं तय करके बैठा था कि अतीक अहमद ने अगर मेरे डीजीपी कार्यकाल में बदमाशी के नाम पर चूं करने की भी कोशिश की, तो मैं उसे बता दूंगा कि कानून कितना ताकतवर और अपराधी किस कदर का कमजोर होता है।'

अतीक और उसके खानदान ने तुरंत महसूस कर लिया कि अब हालात बदल गए हैं। विक्रम सिंह ने आगे कहा, 'जैसे ही अतीक और उसके खानदान ने सूबे में उस वक्त मौजूद रही हुकूमत और मेरा रुख देखा तो उन सबकी हालत खराब हो गई। वे सब समझ गए कि अगर बदमाशी करने की कोशिश भी की तो, उसका अंजाम न केवल उन्हें जेल में ले जाकर ठूंस देगा, बल्कि उनकी जान तक के लाले पड़ जाएंगे।'

असद को साथ लेकर DGP ऑफिस पहुंची शाइस्ता

चार्ज संभालने के करीब एक महीने बाद दोपहर का वक्त था। शाइस्ता परवीन (अतीक की पत्नी) ने डीजीपी कार्यालय के निजी स्टाफ के जरिए मुलाकात का समय मांगा। डॉ. विक्रम सिंह ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें मिल लिया। उनके साथ 5-6 साल का एक छोटा लड़का भी था।

विक्रम सिंह बताते हैं कि, 'शाइस्ता परवीन अपने आप ही उस बच्चे को अपने बराबर वाली कुर्सी पर बैठाते हुए बोली, ‘यह मेरा बेटा असद है’।' फिर वह गिड़गिड़ाते हुए बोलीं, 'साहिब मुकदमा तो आपने उनके खिलाफ (पति अतीक अहमद) दर्ज करवा ही डाला है। बाकी भी आप जो कुछ चाहेंगे करेंगे ही। बस मैं आपसे हाथ जोड़कर आज इतनी सी गुजारिश करने आई हूं कि मेरा सुहाग उजाड़कर मुझे विधवा बेवा मत कर डालना। अगर ऐसा हुआ तो यह बच्चे भी यतीम हो जाएंगे।'

विक्रम सिंह ने शाइस्ता को ‘बेहद घाघ किस्म की महिला’ बताया, जो अपना दिमाग तेज चलाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी संदिग्ध शख्सियत से ज्यादा देर बात करने का कोई मतलब नहीं था। लेकिन उसी दिन उन्होंने ताड़ लिया था कि 'आज जो शाइस्ता अपने पति की जिंदगी बख्श देने के लिए मेरे सामने गिड़गिड़ा रही थी, आने वाले वर्षों में यह बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।'

अब सबके सामने है शाइस्ता की करतूत

आज सब कुछ सामने है। अतीक अहमद और भाई अशरफ 15-16 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में गोली लगने से मारे गए। बेटा असद (जो उस दिन शाइस्ता के साथ था) 13 अप्रैल 2023 को झांसी में यूपी एसटीएफ एनकाउंटर में मारा गया। शाइस्ता परवीन खुद अब फरार है और पुलिस उसे तलाश रही है। पूर्व डीजीपी ने साफ कहा था कि अतीक सिर्फ बाहुबली नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क का हिस्सा था। लेकिन कानून की ताकत ने सब कुछ बदल दिया।