मेला शुरू होने से लेकर मकर संक्रांति तक के 13 दिनों में संगम में तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
मेला शुरू होने से लेकर मकर संक्रांति तक के 13 दिनों में संगम में तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पौष पूर्णिमा के दिन करीब 31 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। मकर संक्रांति से पहले के दिनों में लगभग 85 लाख लोग संगम पहुंचे, जबकि मकर संक्रांति के दिन करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।
मकर संक्रांति के दिन संगम तट पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच लोग संगम की ओर बढ़ते नजर आए। पुलिस ने श्रद्धालुओं को जिस रास्ते से वे आए थे, उसी के पास वाले घाटों पर स्नान की व्यवस्था की। मेला क्षेत्र के बाहर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। सिर पर गठरी, कंधे पर बैग और हाथों में बच्चों को लेकर श्रद्धालु संगम की ओर चलते दिखे। मौसम भी साफ रहा, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए घाटों पर बालू की बोरियां लगाई गई थीं। महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के चेंजिंग रूम की भी अच्छी व्यवस्था की गई थी। बिहार, दिल्ली, बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से आए लोगों ने बताया कि संगम स्नान के बाद वे गंगाजल घर ले जा रहे हैं, ताकि परिवार के सभी लोग इसका लाभ ले सकें।