
Prayagraj School Assault Case: प्रयागराज के कैंट क्षेत्र स्थित एक निजी प्ले स्कूल में तीन साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोप ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस ने स्कूल में डांस सिखाने वाले 17 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया है। अब जांच का फोकस सिर्फ आरोपी से पूछताछ तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस CCTV फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, बच्ची के बयान और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, 22 अगस्त को कैंट थाने में बच्ची की मां की ओर से शिकायत दी गई थी। परिवार को बच्ची की परेशानी का पता तब चला, जब उसने निजी अंग में दर्द की शिकायत की। इसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया और स्कूल में उसके साथ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार आरोपी की उम्र 17 साल कुछ महीने है और वह स्कूल में बच्चों को डांस सिखाता था। उसे हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। मामले में POCSO कानून के तहत कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।
डीसीपी सागर जैन के अनुसार पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद स्कूल से CCTV फुटेज और दूसरे साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब उपलब्ध डिजिटल और अन्य सबूतों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। स्कूल में लगे कैमरों की फुटेज से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्ची किन जगहों पर गई, उस दौरान उसके आसपास कौन-कौन लोग मौजूद थे और आरोपी की गतिविधियां क्या थीं। पुलिस ने स्कूल के अन्य शिक्षकों से भी पूछताछ की है।
पुलिस ने बच्ची की मेडिकल जांच कराई है। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने की बात सामने आई है। इसके अलावा बच्ची का बयान मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज कराया गया है, जिसे जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस ने बच्ची को महिला हेल्प डेस्क प्रभारी के माध्यम से काउंसलिंग भी उपलब्ध कराई। इस तरह जांच में चिकित्सकीय साक्ष्य के साथ बच्ची की मानसिक स्थिति और उसके बयान को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
इस मामले में आरोपी की उम्र 18 साल से कम बताई गई है। ऐसे में जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में किशोर न्याय से जुड़े प्रावधान भी महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपी को मंगलवार को कोर्ट में पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल छोटे बच्चों की स्कूल में सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। तीन साल की उम्र में बच्चे अपनी परेशानी को स्पष्ट तरीके से बता पाने की स्थिति में हमेशा नहीं होते। ऐसे में स्कूल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था, CCTV, कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच और बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की मॉनिटरिंग बेहद अहम हो जाती है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। पुलिस का कहना है कि CCTV, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।