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अब हिजाब पहनकर स्कूल नहीं जा पाएंगी मुस्लिम छात्राएं, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- इस्लामी धर्म का हिस्सा नहीं

Allahabad High Court order on Hijab: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब को लेकर बड़ा आदेश दिया है। जिसमें उन्होंने हिजाब को इस्लामी रिवाज का हिस्सा नहीं बताया है। इसके साथ ही कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया। ‌
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हिजाब पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, फोटो सोर्स- पत्रिका

हिजाब पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, फोटो सोर्स- पत्रिका

Allahabad High Court Orders : इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिजाब को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। यह निर्णय नाबालिग मुस्लिम छात्रा के प्रार्थना पत्र पर दिया गया है। जिसमें उसने हिजाब को इस्लामी धर्म का रिवाज बताया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने आदेश में कहा कि हिजाब धार्मिक रिवाज का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही कर्नाटक फूल बेंच और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक टिप्पणी भी आने लगी। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म स्कूल प्रशासन के नियम के अनुसार चलता है।

नाबालिग छात्रा की याचिका पर हो रही थी सुनवाई

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक नाबालिग छात्रा की तरफ से एक याचिका दाखिल की गई थी। ‌जिसमें उसने बताया था कि हिजाब पहनना इस्लामी धर्म का हिस्सा है और स्कूल यूनिफार्म के साथ हिजाब पहनना जरूरी है। जिसे पहनने की इजाजत दी जाए। इस संबंध में हाई कोर्ट में सुनवाई जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला और जस्टिस जेजे मुनीर की बेंच ने की।

दोनों पक्षों ने अपनी अपनी बात रखी

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने 'हिजाब के पक्ष' को सुनने के बाद कहा कि स्कूल के ड्रेस कोड में बदलाव के लिए कोई भी छात्र-छात्रा जोर नहीं दे सकता है। विद्यालय में सबके साथ एक जैसा, सही, भेदभाव न करने वाला ड्रेस कोड होना चाहिए। जिसका मकसद अनुशासन और संस्था की पहचान बनाए रखना हो।

कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को याद किया गया

इलाहाबाद हाई कोर्ट की अदालत ने कर्नाटक हाई कोर्ट के 2022 के फैसले का भी जिक्र किया। जिसमें फुल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि अलग नजरिया अपनाएं जाने का कोई कारण नहीं है। मुस्लिम छात्राओं, महिलाओं को हिजाब पहनना इस्लामी धर्म के हिसाब से जरूरी धार्मिक की रिवाज नहीं है। यह फैसला बहुत ही कीमती और असरदार बताया। इसके साथी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया गया। जिसमें बताया गया कि ऐशत शिफा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंटा हुआ आदेश दिया था।

क्या कहते हैं कांग्रेस प्रवक्ता?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी है। इस संबंध में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन अपने अनुसार ड्रेस का निर्धारण करता है। पूरे देश में एक कानून है और सभी धर्म के सद्भाव की इजाजत सबको है लेकिन स्कूल यूनिफॉर्म स्कूल प्रशासन के नियमों के अनुसार चलता है। स्कूल प्रशासन का नियम ना टूटे और छात्रों में एकरूपता बनी रहे लेकिन यह ध्यान देने की भी आवश्यकता है कि किसी धर्म विशेष पर कोई चोट नहीं पहुंचनी चाहिए, आंच नहीं आनी चाहिए। इस प्रकार की व्यवस्था स्कूल प्रशासन और जिला प्रशासन को करना चाहिए। ‌

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