
नरेंद्र नाथ अवस्थी की पत्रकारिता की शुरुआत धनबाद (उस समय का बिहार अब झारखंड) में प्रकाशित 'आवाज' पेपर के साथ सन 1987 में हुई थी। उन्नाव के एक लोकल पेपर में स्थानीय संपादक के रूप में काम किया। जिसके लिए काम करते हुए लखनऊ निदेशालय भी जाने का मौका मिला। इसके बाद जनसत्ता (लखनऊ), राष्ट्रीय स्वरूप (लखनऊ) की भी जिम्मेदारी निभाई। लखनऊ से प्रकाशित 'श्री टाइम्स' में ब्यूरो चीफ के रूप काम किया। 2016 से राजस्थान पत्रिका डिजिटल के लिए काम कर रहा हूं। नरेंद्र मुख्य रूप से उन्नाव के अतिरिक्त कानपुर मंडल के जिले कन्नौज, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया के लिए रिपोर्टिंग करते हैं। प्रशासन, राजनीति, क्राइम, रेलवे, शिक्षा, सरकारी योजना के साथ सामाजिक हितों से जुड़े मुद्दों पर कवरेज करते हैं। जनता से जुड़े मुद्दे, पीड़ितों की समस्या, अधिकारियों से संबंधित मुद्दे पर बातचीत के बाद समाचार का रूप देता हूं। खबरे पुष्टि के बाद पूरी होती है। इस चीज का हमेशा ध्यान रखता हैं। निष्पक्ष पत्रकारिता ही जीवन का लक्ष्य है। पिछले पिछले तीन दशक से हो रही पत्रकारिता साफ सुथरी रही। बदनामी से डरते हैं। शिक्षा की बात की जाए तो नरेंद्र नाथ अवस्थी की पढ़ाई झारखंड के (पहले बिहार) के धनबाद जिले के डीएवी स्कूल हाई स्कूल करने के बाद झरिया के आरएसपी डिग्री कॉलेज से इंटर और स्नातक की शिक्षा पूरी। पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक का अनुभव है। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी समय-समय पर नई-नई नीतियां आती है। जिसके साथ अपने आप को अपडेट करना पड़ता है। लगातार सीखने की गुंजाइश बनी रहती है। ट्रेडिल मशीन से शुरू हुई पत्रकारिता अब कंप्यूटर और मोबाइल में सिमट कर रहे हैं। कुछ मामलों में पत्रकारिता काफी आसान हो गई है। लेकिन नरेंद्र नाथ अवस्थी अपने लिखे हुए ओरिजिनल कंटेंट पर भरोसा करते हैं और इसी नियम पर चलते हैं। इससे किसी प्रकार का समझौता नहीं करते हैं।
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