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UPI Payment : रिटेल पेमेंट 84 फीसदी यूपीआई से, एमडीआर से बढ़ेगी बाजार की परेशानी, क्या बढ़ेगा कैश फ्लो?

UPI Payment : डिजिटल इंडिया के दौर में जब यूपीआई ने लेन-देन को बेहद आसान बना दिया है, वहीं इसके साथ एक नई समस्या भी सामने आ रही है। कई क्षेत्रों में कारोबारी अब यूपीआई भुगतान से इनकार करने लगे हैं। दूसरी ओर, सिमटते एटीएम और बैंक शाखाओं का बदलता स्वरूप नकद लेन-देन की जरूरत को फिर चर्चा में ला रहा है। सवाल है- क्या डिजिटल भुगतान के बीच कैश इकॉनोमी फिर मजबूत होगी? इस बारे में देवेंद्र गोस्वामी की विस्तृत रिपोर्ट पढ़िए।
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भारत

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Swatantra Mishra

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देवेंद्र गोस्वामी

•

Sep 26, 2026

MDR

यूपीआई भुगतान से मना करने लगे हैं कारोबारी (Photo: ChatGpt)

UPI Payment : भारत में रिटेल वित्तीय लेन-देन के तौर-तरीके पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी रूप से बदल चुके हैं। चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक क्यूआर कोड के विस्तार ने नकदी पर निर्भरता को कम किया है। भारतीय रिज़र्व बैंक और वित्तीय संस्थाओं के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की लोकप्रियता ने पारंपरिक बैंकिंग ढांचे, विशेष रूप से एटीएम नेटवर्क पर गहरा असर डाला है। वहीं, शून्य लागत पर चलने वाले इस डिजिटल मॉडल में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर हो रही बहस और नए शुल्कों की चर्चाओं ने बैंकिंग सिस्टम, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के सामने नई पेचीदगी खड़ी कर दी हैं।

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