
Prayagraj Flood: संगम नगरी प्रयागराज में पिछले तीन दिनों से गंगा और यमुना नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे प्रशासन ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, फाफामऊ में गंगा का पानी थमने और नैनी में यमुना के घटने की रफ्तार सुस्त होने से चिंता की स्थिति अभी बनी हुई है। मंगलवार रात आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.67 मीटर पर स्थिर रहा, जबकि छतनाग में यह 79.10 मीटर दर्ज किया गया। वहीं नैनी में यमुना का जलस्तर 79.56 मीटर रहा। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के पास जलस्तर के स्थिर होने और घटने की गति धीमी पड़ने का फिलहाल कोई स्पष्ट कारण उपलब्ध नहीं है।
अगस्त महीने में हुई लगातार बारिश और जलभराव के कारण प्रयागराज में एक दर्जन छोटे पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसे देखते हुए पूरे प्रदेश में क्षतिग्रस्त पुलों की विशेष मरम्मत कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। शासन ने प्रयागराज सहित सभी जिलों से ऐसे पुलों की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से मांगी है। शासन के स्तर पर छह मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों की मरम्मत कराने का निर्णय लिया गया है।
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी प्रयागराज की ओर से क्षतिग्रस्त पुलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता मो. अरशद के मुताबिक, विशेष मरम्मत के अंतर्गत भेजी जाने वाली सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बजट तय किया जाएगा। उनके अनुसार बजट जारी होते ही पुलों की मरम्मत के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।
प्रयागराज एयरपोर्ट के पास गौसपुर कटहुला के एक हिस्से में जलभराव के चलते करीब दो दर्जन परिवार पिछले एक सप्ताह से अपने घरों में कैद हैं। घरों के आसपास पानी भरे होने से लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इस वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और नौकरी करने वाले कई लोगों को छुट्टी लेनी पड़ी है।स्थानीय निवासियों के मुताबिक, मोहल्ले में जलीय जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ने लगा है। मंगलवार को पानी से घिरे दो घरों में सांप घुसने से अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलभराव की बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक पानी निकालने के लिए पंप नहीं भेजा गया है। पीड़ितों ने स्थानीय पार्षद से भी पानी निकासी की गुहार लगाई, लेकिन उनके मुताबिक कोई मदद नहीं मिली।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और नगर निगम से तत्काल पंप लगाकर पानी निकालने, सफाई कराने और जहरीले जीव-जंतुओं से बचाव के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। जलभराव में फंसे पीड़ितों के मुताबिक, आसपास के मोहल्लों में पानी निकालने के लिए पंप भेजे जा रहे हैं, लेकिन उनके इलाके में पार्षद सिर्फ आश्वासन देकर चले गए। रामनरेश ने यह भी बताया कि जलभराव की चपेट में आए घरों में अनाज खत्म होता जा रहा है।