Monsoon Delay Pune: मानसून में देरी और कम बारिश की आशंका को देखते हुए पुणे शहर में पानी की किल्लत से निपटने की तैयारी शुरू हो गई है। सोमवार से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जाएगी। प्रशासन ने स्विमिंग पूल और गाड़ी धोने के सेंटर्स को बंद करने का आदेश दिया है ताकि बचा हुआ पानी अगस्त के अंत तक चलाया जा सके।

Pune Municipal Corporation: महाराष्ट्र के शहर पुणे को मुख्य रूप से चार बांधों खडकवासला, पानशेत, वरसगाव और टेम्घर से पानी मिलता है। इसके अलावा थोड़ा पानी भामा आस्खेड और पवना बांध से भी आता है। हाल ही में महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग ने पुणे महानगर पालिका को चेतावनी दी है कि मानसून के आने में देरी और एल-नीनो के असर के कारण इस बार कम बारिश की भविष्यवाणी की गई है। बांधों में पानी का स्टॉक काफी कम है, इसलिए इसका इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करना होगा ताकि यह स्टॉक कम से कम अगस्त के अंत तक चल सके।
शहर की मेयर मंजूषा नागपुरे ने पुणे के हालातों को देखते हुए बताया कि अभी तो केवल 5,000 मिलियन क्यूबिक फीट यानी 5 टीएमसी पानी बचा है। इसमें से भी शहर के इस्तेमाल के लिए सिर्फ 3 टीएमसी पानी ही बचा है। ऐसे में पानी की गंभीर किल्लत से बचने के लिए प्रशासन ने सोमवार से शहर में एक दिन छोड़कर यानी अल्टरनेट डेज पर पानी की सप्लाई करने का फैसला किया है। इस कटौती से शहर में रोजाना 400 मिलियन लीटर पानी की बचत होगी, जिससे मौजूदा स्टॉक को 20 अगस्त तक खींचा जा सकेगा। इसके साथ ही मेयर ने पानी के टैंकर सर्विस देने वालों से भी अपील की है कि वे इस संकट के समय में अपने दाम न बढ़ाएं।
इस पानी कटौती को सख्ती से लागू करने के लिए पुणे नगर निगम ने कई कड़े कदम उठाए हैं। शहर के सभी स्विमिंग पूल और गाड़ियां धोने वाले वॉटर वाशिंग सेंटर्स को तुरंत बंद करने का आदेश दिया। म्युनिसिपल कमिश्नर नवल किशोर राम ने साफ कर दिया है कि नगर निगम द्वारा सप्लाई किए जाने वाले पीने के पानी का इस्तेमाल किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर नहीं किया जाएगा। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। बिल्डरों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को काम के लिए सिर्फ बोरवेल, कुएं या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का ही इस्तेमाल करना होगा।
इसके अलावा कमिश्नर ने सभी हाउसिंग सोसायटियों के लिए अपने एसटीपी को चालू रखना और रीसायकल किए गए पानी का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया है। होटलों, रेस्टोरेंट्स और हॉस्टलों को भी पानी बचाने की सख्त हिदायत दी गई है। उन्हें कहा गया है कि वे कपड़े या बर्तन धोने से निकलने वाले ग्रे वॉटर को रीसायकल करें और उसका इस्तेमाल गार्डनिंग या सिंचाई के लिए करें। हालांकि, भामा आस्खेड बांध से पानी पाने वाले इलाकों में अभी कटौती नहीं की जाएगी क्योंकि वहां के निवासियों को पहले से ही मटमैला पानी मिल रहा है।
कमिश्नर ने यह भी बताया कि इस पानी कटौती को पूरे शहर में एरिया के हिसाब से बहुत संभलकर लागू किया जाएगा ताकि अचानक पानी बंद करने या चालू करने से पाइपलाइन फटने जैसी तकनीकी दिक्कतें पैदा न हों। मेयर ने साल 2013-14 के सूखे की याद दिलाते हुए कहा कि उस वक्त हालात इतने बिगड़ गए थे कि सालभर तक पानी की कटौती झेलनी पड़ी थी। वैसी नौबत दोबारा न आए, इसीलिए यह सारे कदम अभी से उठाए जा रहे हैं ताकि जनता को आगे चलकर ज्यादा परेशान न होना पड़े।