रायगढ़

योजनाओं में आ रहा लाखों का चेक, सरकारी खाता नहीं होने से निजी खातों में करवा रहे कैश

- सामान्य रूप से साल में औसतन दो से ढाई लाख रुपए प्रति वेटनरी असिस्टेंट फंड होता है जारी
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Dec 28, 2017
योजनाओं में आ रहा लाखों का चेक, सरकारी खाता नहीं होने से निजी खातों में करवा रहे कैश

रायगढ़. पशुपालन विभाग में किसी भी वेटनरी अस्टिेंट का सरकारी खाता नहीं है यानि कि इस पद का कोई अधिकृत खाता बैंक में नहीं खुला है। जबकि योजनाओं का पैसा या तो ड्राफ्ट के माध्यम से या फिर चेक के माध्यम से इन अधिकारियों के पद के नाम से इनके पास आता है। परेशानी यह होती है कि इस पैसे को वो कहां कैश करवाएं, ऐसे में वो तकनीकी तौर पर अपने निजी खातों में कैश करवा रहे हैं।

जिसका नाम तो वेटनरी अस्स्टिेंट खाता का मिला है पर तकनीकी तौर पर वह मान्य नहीं है वो निजी खाता ही है। क्योंकि इस प्रकार के खाते बिना वित्तमंत्रालय की अनुमति व डीडीओ कोड के नहीं खुल सकता है, इसके अलावा उस पद का टेन नंबर और केवाईसी भी इसमें चाहिए होती है। जो जानकारी सामने आ रही है उसमें कसी भी वेटनरी असिस्टेंट को डीडीओ कोड नहीं मिला है क्योंकि उन्हें आहरण वितरण का अधिकार यानि कि जिसे ड्राइंग डिस्परसमेंट कहते हैं वो नहीं हैं।

मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले ऐसे नौ खातों का संचालन किया जा रहा है जहां सामान्य रूप से साल में औसतन दो से ढाई लाख रुपए प्रति वेटनरी असिस्टेंट फंड जारी होता है। हलांकि इस पूरी प्रक्रिया को विभागीय सहमति और कार्य सुविधा के नाम पर चलाया जा रहा है।

बस्तर में हुआ बंद
विदित हो कि इस प्रकार के वीएस खाते को बस्तर में बंद करवा गया है। यदि उत्तर बस्तर के उपसंचालक पशु एवं स्वास्थ्य सेवाएं के १ जनवरी 2017 के जारी आदेश को देखें तो उसमें यह स्पष्ट कहा गया है कि वित्त मंत्रालय के जारी निर्देश के अनुसार कोई भी खाता बिना मंत्रालय के पूर्व अनुमति के नहीं खोला जाए। ऐसे में यदि किसी भी वेटनरी असिस्टेंट के नाम से कोई खाता खोला गया हो तो इसको बंद किया जाए। इसके बाद वहां के सारे खाते बंद करवा दिए गए, लेकिन यहां पर या अन्य जिलो में ऐसा नहीं किया गया है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। कि ऐसा क्यों नहीं हो रहा है।

अब आ रही है दिक्कत
कुछ वेटनरी सहायकों से बात की गई तो पता चला कि अब इन खातों में परेशानी आ रही है बैंक की ओर से इन खातों की केवाईसी मांगी जा रही है। खाता खुलवाने के दौरान चालाकी यह की गई कि नाम के साथ वीएस के पद को जोड़ा गया था पर खाता संबंधित नाम का ही था। इसलिए केवाईसी में भी सबंधित के दस्तावेज मांगे जा रहे है। इस प्रकार जो भी लेन-देन होगा वो दस्तावेज के आधार पर उनके ही खाते में काउंट होगा।

यहां भी उठी है चेक की मांग, पर लटकी
बस्तर में खाते बंद होने के बाद अब वहां पर वीएस के नाम से चेक कट रहा है और उन पैसों को योजना में लगाया जा रहा है। हलांकि नकद पैसा निकालना और उसे अपने पास रखना और योजनाओं में लगाया जाना यह भी एक प्रकार से रिस्क का कार्य है पर ऐसा ही चल रहा है। जिले में भी वेटनरी असिस्टेंट की ओर से चेक जारी करने की मांग उठाई जा रही है।

Published on:
28 Dec 2017 12:35 pm