CG Elephant Terror: रायगढ़ जिले में 123 हाथियों की बढ़ती मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जंगलों के साथ-साथ गांवों के आसपास भी हाथियों की आवाजाही बढ़ने से वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
CG Elephant Terror: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की बढ़ती संख्या अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। धरमजयगढ़ वन मंडल में वर्तमान में कुल 123 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। जंगलों के साथ-साथ अब इनका मूवमेंट गांवों के आसपास भी बढ़ गया है, जिससे ग्रामीणों में दहशत और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
जिले के छाल वन परिक्षेत्र में 35 हाथियों का एक बड़ा दल देखा गया है। इस दल में 3 नर, 25 मादा और 7 शावक शामिल हैं। सोमवार शाम बोजिया परिसर के पेलमबांध क्षेत्र में यह झुंड विचरण करता नजर आया, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
हाथियों का यह दल जंगल के साथ-साथ गांवों के आसपास भी घूमता नजर आया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। स्थानीय लोगों ने हाथियों की मौजूदगी की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी।
स्थिति को देखते हुए हाथी मित्र दल लगातार निगरानी कर रहा है। बोजिया से औरानारा मार्ग, गड़ाईनबहरी और सिंघीझाप क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
एक वीडियो में देखा गया कि सड़क पर आए हाथियों को हाथी मित्र दल के सदस्य ने आवाज देकर सुरक्षित जंगल की ओर लौटा दिया। इससे पहले भी इसी तरह की घटनाओं में हाथियों को गांवों से दूर किया गया है। जानकारी के अनुसार यह हाथी दल घरघोड़ा क्षेत्र से छाल रेंज में पहुंचा है। वन विभाग लगातार उनके मूवमेंट पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार छाल रेंज में 59, धरमजयगढ़ रेंज में 48, लैलूंगा रेंज में 13 और रायगढ़ रेंज में 3 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इस तरह जिले में कुल 123 हाथी हैं, जिनमें 36 नर, 62 मादा और 26 शावक शामिल हैं।
वन विभाग द्वारा हाथियों की निगरानी ड्रोन और जमीनी टीम के जरिए की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है। छाल रेंज अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही रात के समय जंगल या सुनसान इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
रायगढ़ जिले में हाथियों की बढ़ती संख्या वन विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए स्थानीय लोगों का सहयोग भी जरूरी है।