
रायगढ़. लोगों में यातायात नियमो को लेकर जागरूक करने के लिए जवानों ने ऐसे वाहन चालक जो नियमो ंका पालन कर रहे है, उनको रक्षा सूत्र बांधा। यातायात डीएसपी ने बताया कि शहर में यातायात के नियमों का पालन कराने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम किया जाता है। कार्रवाई करने के बाद भी वहां चालक नियमो का पालन नही करते है। इसको देखते हुए इस बार ऐसा कार्यक्रम बनाया गया है जिससे नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहन चालकों को भी दिखे और उनके मन मे भी इसको लेकर जागरूकता पैदा हो।
रविवार को शहर के बायपास मार्गो व शहर के अंदर भी अलग-अलग जगहों में यातायात जवानों की टीम ने ऐसे वाहन चालक जो हेलमेट, लगाकर चल रहे है और इसके अलावा यातायात के अन्य नियमो का पालन कर रहे हैं को रोक कर बकायदा उनको रक्षा सूत्र बांधा गया। विभाग का मानना है कि इससे अन्य वाहन चालकों के बीच जागरूकता आएगी।
बदल दिया रास्ता
छातामुड़ा बायपास के समीप यातायात टीम के इस अभियान को देखकर वो दोपहिया चालक जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था ने रास्ता बदल दिए तो कई वाहन चालक डरे-सहमे वहां से निकले।
-रक्षाबंधन के दिन यातायात के जवान एवं अधिकारी ऐसे वाहन चालकों को जो हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे हैं यातायात के नियमों का पालन कर रहे हैं, उनकी कलाई में रक्षा सूत्र बांधे जा रहे हैं, क्योंकि वह सुरक्षित दो पहिया वाहन चालन को बढ़ावा भी दे रहे हैं- एसएन परिहार, डीएसपी यातायात
सुबह से ही सड़कें रही गुलजार
रविवार को पूरे शहर में रक्षा बंधन का त्यौहार हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। इस दिन जहां बहनें चहक रही थीं, वहीं भाई भी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। सुबह से ही शहर की सड़कें गुलजार हो गई थी। राखी की दुकानों में, मिठाई की दुकानों में काफी भीड़ लगी हुई थी। इसके अलावा इस पर्व का सबसे ज्यादा क्रेज बच्चों में देखा जा रहा था।
कई साल बाद इस राखी में मुहूर्त को लेकर किसी प्रकार की हड़बड़ी नहीं दिखी। पहले भद्रा व अन्य कारणों से मुहुर्त का बंधन भाई और बहनों को हड़बड़ी में डाल देता था। लेकिन इस बार ऐसा कोई बंधन नहीं था इसके कारण बहन और भाई बड़े ही निश्चिंत होकर इस पर्व के उत्साह का आनंद ले रहे थे। इन सबके बीच शहर के जिला जेल में भी रक्षा बंधन का उत्साह जोरों पर रहा। बस फर्क इतना था कि बहन और भाई दोनों की आंखों में आंसू थे। ये आंसू किसी आंख के कोरों से से रिसते दिखे तो किसी की आंख में बरसते दिखे।
शहर के जिला जेल में रक्षा बंधन को लेकर बहन और भाई दोनों के लिए व्यवस्था की गई थी। जेल में बंद भाई को राखी बांधने जहां बड़ी संख्या में बहनें पहुंची वहीं जेल में बंद बहनों के भाई भी राखी बंधवाने के लिए पहुंचे थे। जब राखी बांधने का क्रम शुरू हुआ तो जो बहनें अपने बंदी भाई के लिए पहुंची थी उनकी यह दुआ थी कि जल्दी छूटकर आना, वहीं जो भाई जेल में बंद अपनी बहन से राखी बंधवाने पहुंचे थे उनका वचन था कि जल्द ही तुम्हें छुड़ाकर ले जाउंगा। जेल प्रशासन की ओर से भी पूरी व्यवस्था की गई थी। दोपहर बाहर बजे तक लगभग सौ से डेढ़ सौ बंदियों की बहनें राखी बांधने के लिए पहुंच गई थीं। वहीं शाम तक उनका पहुंचना जारी था।
की गई थी पूरी व्यवस्था
रक्षा बंधन को लेकर जिला जेल में पूरी व्यवस्था की गई थी। गेट के सामने संभावित भीड़ को देखते हुए बेरिकेट्स लगाए गए थे। चलित शौचालय की व्यवस्था की गई थी, पानी के टैंकर मंगवाए गए थे। साथ ही राखी लेकर पहुंची बहनों का विशेष ध्यान रखने के लिए जवान भी तैनात किए गए थे। वहीं जेल में बहनों और भाईयों दोनों के लिए राखी व मिठाई की भी व्यवस्था की गई थी। रक्षा बंधन के अवसर पर कई समाजिक संगठनों की ओर से भी महिलाएं पहुंची थी और जेल में बंद बंदियों और कैदियों को राखी बांध कर मिठाई खिलाई।