रायपुर

रायपुर में 21 फीट ऊंची अंबेडकर प्रतिमा का लोकार्पण आज, कांसे के स्क्रैप से बनी प्रदेश की सबसे ऊंची मूर्ति

Ambedkar statue Raipur: रायपुर के घड़ी चौक पर 21 फीट ऊंची कांसे की डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा का अंबेडकर जयंती पर लोकार्पण किया जाएगा, जिसे स्क्रैप मटेरियल रीसायकल कर तैयार किया गया है।
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Apr 14, 2026
रायपुर में 21 फीट ऊंची अंबेडकर प्रतिमा का लोकार्पण आज, कांसे के स्क्रैप से बनी प्रदेश की सबसे ऊंची मूर्ति(photo-patrika)
रायपुर में 21 फीट ऊंची अंबेडकर प्रतिमा का लोकार्पण आज, कांसे के स्क्रैप से बनी प्रदेश की सबसे ऊंची मूर्ति(photo-patrika)

Ambedkar statue Raipur:ताबीर हुसैन. छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश की राजधानी के घड़ी चौक पर स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर की कांसे से बनी 21 फीट की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण 14 अप्रैल को किया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह छत्तीसगढ़ की अब तक की सबसे ऊंची कांसे की अंबेडकर प्रतिमा है, जो न केवल कला का उत्कृष्ट नमूना है बल्कि सामाजिक सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक भी बनेगी।

इस प्रतिमा को भिलाई के कलाकार परवेज आलम और उनकी टीम ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा लगभग 4300 किलोग्राम वजन की है और इसे तैयार करने में करीब 6 महीने का समय लगा। प्रतिमा के निर्माण में बाहर से मंगाए गए धातु के साथ-साथ स्थानीय स्क्रैप मटेरियल को रीसायकल कर विशेष मिश्रण तैयार किया गया, जिसके बाद कास्टिंग की प्रक्रिया से इसे अंतिम रूप दिया गया। निर्माण कार्य में करीब 8 कारीगरों की मुख्य टीम ने दिन-रात मेहनत की।

Ambedkar statue Raipur: आजादी से पहले रायपुर आए थे बाबा साहेब, जनसभा को किया था संबोधित

रायपुर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण 14 अप्रैल को घड़ी चौक के पास किया जाएगा। बेल मेटल से बनी यह प्रतिमा खास आकर्षण का केंद्र है। बाबा साहेब भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संविधान देश की रगों में ऑक्सीजन की तरह प्रवाहित होता है।

ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि 12 दिसंबर 1945 को बाबा साहेब रायपुर आए थे और तत्कालीन लॉरी स्कूल, वर्तमान माधवराव सप्रे शाला परिसर में जनसभा को संबोधित किया था, जिससे छत्तीसगढ़ की धरती उनके विचारों से प्रेरित हुई।

10 साल पुरानी मांग हुई पूरी

यूनिटी फॉर सोशल जस्टिस के अध्यक्ष डॉ. जन्मजय सोना ने बताया कि सही पोस्चर वाली प्रतिमा की मांग 2016 से की जा रही थी। प्रतिमा की भाव-भंगिमा समाज को संदेश देती है और अब यह मांग पूरी होना गर्व का विषय है।

संघर्ष के बाद मिला सही स्वरूप

आयोजन से जुड़े सुनील वांदरे ने बताया कि पहले प्रतिमा को लेकर कई विवाद और विरोध हुए। 40 साल पहले कलेक्टरेट में स्थापना नहीं हो पाई थी, जिसके बाद दूसरी जगह प्रतिमा लगाई गई। अब भव्य और सही स्वरूप में प्रतिमा स्थापित होना पूरे समाज के लिए गर्व और संतोष की बात है।

Published on:
14 Apr 2026 12:06 pm