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होटल, रेस्टोरेंट में परोसा जा रहा “एनालॉग पनीर”, मछली के कार्टून में पैक, न एक्सपायरी, न तारीख

Analog Cheese: शहर में बड़ी मात्रा में "असली पनीर" के नाम पर "एनालॉग पनीर" का खेल चल रहा है। पत्रिका की पड़ताल में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। बता दें कि छापेमारी के बाद भी गोरखधंधा जारी है..

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Analog Cheese

मछली के कार्टून में पैक हो रहा "एनालॉग पनीर ( Photo - Patrika )

Analog Cheese: अजय रघुवंशी. असली पनीर के नाम पर बाजार में एनालॉग और अमानक पनीर का खेल बेखौफ जारी है। इसे बाजार में असली और प्रोटीन युक्त पनीर बताकर बेचा जा रहा है। यह पनीर होटल, रेस्टोरेंट के माध्यम में लोगों की थाली में जा रहा है। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि भाठागांव स्थित फैक्ट्री में मछली के कार्टून में एनालॉग पनीर की पैकिंग की जा रही थी और दलालों के माध्यम से इसे खुले में प्रोटीनयुक्त पनीर बताकर सप्लाई किया जा रहा था।

Analog Cheese: छापेमारी के बाद भी जारी है गोरखधंधा

बीते महीने खाद्य विभाग की छापेमारी के बाद भी बाजार में यह गोरखधंधा जारी है। भाठागांव के केसरी बगीचा, हरिओम नगर स्थित केएलपी डेयरी एंड प्रोडक्ट्स में रविवार को खाद्य विभाग की दूसरी बार छापेमारी कार्रवाई हुई,वहीं उरला के एसजे डेयरी में गंभीर खामी पाई गई। पड़ताल में यह जानकारी सामने आई कि सस्ते पॉम ऑयल, दूध पॉवडर, स्टार्च और फैट मिलाकर यह पनीर तैयार किया जा रहा था, जो कि असली पनीर की तुलना में कम पोषण वाला होता है, फिर भी इसे बिना लेबल, बिना एक्सपायरी और बिना सामग्री की जानकारी के खुले में खपाया जा रहा था।

मछली का कार्टून, न एक्सपायरी, न तारीख

भाठागांव और उरला में हुई छापेमारी के बाद बाजार में हडक़ंप की स्थिति बन गई है। कई महीनों से यहां पनीर की फैक्ट्री चल रही थी, जिससे सप्लाई चेन प्रदेश भर से जुड़ी है। छापेमारी के बाद संचालक और मैनेजर फरार हो चुके हैं। पत्रिका टीम जब भाठागांव स्थित फैक्ट्री पहुंची तो यहां भीतर मछली का कार्टून रखा हुआ मिला। काम करने वाले वर्कर नीरज यादव ने बताया कि मैनेजर और संचालक छापेमारी के बाद नहीं है।

सुलगते सवाल :-

  1. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की कारगुजारी का आलम यह है कि भाठागांव में जहां पहली बार अमानक पनीर मिला फिर वहीं छापेमारी में बड़ी खामियां मिली।
  2. विभागीय अधिकारियों को शहर में चल रहे पनीर फैक्ट्रियों की जानकारी नहीं।
  3. खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नगर-निगम, जिला प्रशासन के खाद्य विभाग जुर्माना वसूलने में व्यस्त। केंद्रीय नियमों का पालन नहीं करवा पा रहे।
  4. अमानक खाद्य पदार्थों के मामले कोर्ट में लबित, दोषियों को नहीं हुई सजा।

कैसे बनता है एनालॉग पनीर :-

पानी में स्किम्ड मिल्क पाउडर या व्हे पाउडर घोला जाता है। इसमें वनस्पति तेल मिलाकर इमल्सीफायर डाला जाता है। मिश्रण को गर्म करके गाढ़ा किया जाता है। स्टार्च मिलाकर टेक्सचर सेट किया जाता है। फिर मोल्ड में डालकर ठंडा किया जाता है। जमने के बाद इसे "पनीर" की तरह काट लिया जाता है।

खास बातें :-

  1. प्रोसेस्ड पनीर, एनालॉग पनीर और नॉन डेयरी पनीर लिखना जरूरी।
  2. उपयोग की गई सामग्री की जानकारी, न्यूट्रिशन तत्वों के साथ।
  3. एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर।
  4. पैकेट पर गाय या दूध की तस्वीर नहीं लगा सकते।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, नियंत्रक, दीपक अग्रवाल ने कहा कि एनालॉग पनीर को ब्रांड, लेबलिंग के साथ पैकेजिंग करके बेचने का नियम है। छापे में गंभीर खामियां मिली हैं। इस पर लाइसेंस नंबर, मैन्युफेक्चरिंग की तारीख, मिलाए गए तत्वों की जानकारी और हर छह महीने की रिपोर्ट फूड सेफ्टी अथारिटी की वेबसाइट में अपलोड करनी है। भाठागांव और उरला की फैक्ट्रियों से सैंपल जब्त किए गए हैं। अधिकारियों को अन्य स्थानों पर जांच के आदेश दिए गए हैं।

10 साल की सजा और 10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान

एडवोकेट मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि भाारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के प्रावधानों के अनुसार भ्रामक जानकारी देकर खाद्य पदार्थ बेचने पर 10 लाख रुपये तक और गुणवत्ताहीन खाद्य पदार्थ के निर्माण पर 5 लाख रुपये तक जुर्माने, वहीं आजीवन कारावास का भी प्रावधान है। भारतीय न्याय संहिता में भी कड़े प्रावधान किए गए हैं।

सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन ने बताया कि अमानक, नकली व मिलावटी पनीर खाने से अपच, फूड पायजनिंग, पेट में जलन, गैस व दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अमानक पनीर बनाने में अक्सर डिटर्जेंट, सल्फ्यूरिक एसिड, यूरिया और फॉर्मेलिन (शवों को सुरक्षित रखने वाला रसायन) का उपयोग किया जाता है। ये रसायन कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाले) होते हैं। किडनी डैमेज व शरीर के अन्य अंगों को हानि हो सकती है। यही नहीं एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते, गले या होंठ में सूजन, सांस लेने में परेशानी हो सकती है।