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Stone patients in Raipur: रायपुर-दुर्ग में दूषित पानी से बढ़ा ‘स्टोन’ का खतरा, बच्चे-बुजुर्ग हो रहे शिकार, अब हर माह 30 से ज्यादा पीड़ित

Health News: बच्चे और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में हर माह 30 से अधिक नए मरीज पहुंच रहे हैं।

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Stone Patients in Raipur

रायपुर-दुर्ग में दूषित पानी से बढ़ा 'स्टोन' का खतरा (Photo AI)

Stone patients in Raipur: प्रदेश में खानपान की खराब आदतों, जंक फूड, शराब के अत्यधिक सेवन और दूषित पानी के कारण पथरी (किडनी व गाल ब्लैडर स्टोन) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं रायपुर-दुर्ग में अधिक मामले सामाने आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब बच्चे और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जिससे डॉक्टर भी हैरान हैं। सरकारी अस्पतालों जैसे मेकाहारा (आंबेडकर अस्पताल), डीकेएस सुपर स्पेशलिटी और निजी अस्पतालों में ऐसी सर्जरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

Stone Patients in Raipur: हर महीने औसतन 65 से 70 मरीजों के स्टोन निकाले

विशेषज्ञों के अनुसार, पहले बच्चों में पथरी के मामले बेहद दुर्लभ (रेयर) होते थे। 5 साल पहले जहां महीनेभर में बच्चों का कोई केस बमुश्किल ही आता था, वहीं अब अस्पतालों में हर महीने औसतन 30 से अधिक बच्चों के केस आ रहे हैं। इसी तरह, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी गाल ब्लैडर स्टोन के केस तेजी से बढ़े हैं, जिसका बड़ा कारण शराब का अत्यधिक सेवन माना जा रहा है। वर्तमान में शहर के प्रमुख अस्पतालों में हर महीने औसतन 65 से 70 मरीजों के स्टोन निकाले जा रहे हैं।

500 टीडीएस से अधिक का पानी सेहत के लिए खतरा

पीने के पानी में घुले हुए ठोस पदार्थों की मात्रा (टीडीएस) अगर 500 से अधिक हो, तो वह पानी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन जाता है। इस पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो शरीर में जाकर पथरी का रूप ले लेती है। रायपुर और दुर्ग जिलों में औद्योगिक कचरे (अपशिष्ट) के कारण भूजल का टीडीएस 500 से पार हो चुका है। पानी में कैल्शियम 200 मिलीग्राम और मैग्नीशियम 150 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक होना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

बढ़ता वजन और मोटापा भी बड़ी वजह

कोरोनाकाल के बाद से बच्चों और युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ा है, जो पथरी का एक और प्रमुख कारण है। इसके अलावा, भोजन में प्रतिदिन 3 से 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन भी पथरी और हाइपरटेंशन की बीमारी को न्योता दे रहा है।

केस-1: 10 साल के बच्चे को 11 एमएम की पथरी

बचपन से ही अत्यधिक जंक फूड खाने के आदी एक 10 वर्षीय छात्र को पेशाब करते समय गंभीर दर्द की शिकायत हुई। सोनोग्राफी जांच में उसके गुर्दे में 11 एमएम की पथरी पाई गई। डॉक्टरों के मुताबिक, फास्ट फूड में अत्यधिक नमक, तेल और सोडा का इस्तेमाल होता है, जो बच्चों में पथरी का मुख्य कारण बन रहा है।

केस-2: 69 वर्षीय बुजुर्ग के यूरेटर में स्टोन

रायपुर के एक 69 वर्षीय बुजुर्ग को अचानक पीठ में असहनीय दर्द हुआ। सीटी स्कैन कराने पर उनके ऊपरी यूरेटर में पथरी मिली। डॉक्टरों के अनुसार, आमतौर पर 60 साल के बाद पथरी के केस कम आते हैं, लेकिन उक्त बुजुर्ग लंबे समय से शराब का सेवन कर रहे थे, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

मुख्य कारण

जेनेटिक: यदि परिवार में किसी को पहले पथरी रही हो।
कम पानी पीना: दिनभर में शरीर की आवश्यकता से बहुत कम पानी पीना।
बीमारियां: डायबिटीज, गाउट (यूरिक एसिड बढ़ना) और मोटापा।
गलत डाइट: भोजन में अत्यधिक प्रोटीन, सोडियम (नमक) और शक्कर का इस्तेमाल।
शारीरिक निष्क्रियता: नियमित व्यायाम या एक्सरसाइज न करना।

एक्सपर्ट व्यू

पिछले कुछ वर्षों में गाल ब्लैडर में पथरी के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिसमें कम उम्र के बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। बहुत कम पानी पीना और मोटापा इस बीमारी के सबसे बड़े कारक हैं। इसके अलावा, डायबिटीज के मरीजों में भी इसका रिस्क काफी ज्यादा रहता है। जंक फूड से दूरी बनाकर और पर्याप्त पानी पीकर ही सेहत को बेहतर रखा जा सकता है।

-डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन, श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज

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