
आपातकाल के समय थाने में बंद रहने वालों को भी मिलेगी सम्मान निधि (Photo AI)
Government Scheme: राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में बड़ा बदलाव किया है। अब आपातकाल के समय जेल या थानों में राजनीतिक या सामाजिक कारणों से बंद रहने वालों को भी सम्मान निधि मिलेगी। अभी तक सिर्फ जेल में बंद रहने वालों को इस निधि का लाभ मिल रहा था। नए नियम में लोकतंत्र सेनानी (मीसाबंदी) को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जैसी चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा।
इसके अतिरिक्त उन्हें 8 हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक की सम्मान निधि भी दी जाएगी। जिन्हें पहले सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है, उन्हें आवेदन नहीं करना होगा। राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना 20 मई को जारी की है। अधिसूचना जारी होने के 90 दिन के भीतर पात्र व छूटे मीसाबंदी आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के मुताबिक, लोकतंत्र सेनानी के मरणोपरांत, उनकी अंत्येष्टि के लिए 25.000 रुपए की वित्तीय सहायता, उनके परिवार के प्रमुख को दी जाएगी।
सम्मान राशि प्राप्त करने के लिए लोकतंत्र सेनानी या दिवंगत लोकतंत्र सेनानी के पति/पत्नी को राजनीतिक या सामाजिक कारणों से जेल या पुलिस थाने में निरुद्ध रहने के प्रमाण-पत्र सहित प्रारूप-एक में जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन प्रस्तुत करना होगा। जेल की दशा में, जेल अधीक्षक का प्रमाण-पत्र तथा पुलिस थाने की दशा में, जिला पुलिस अधीक्षक का प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
सम्मान राशि की पात्रता/अपात्रता के संबंध में अनुशंसाएं करने के लिए जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष जिले के प्रभारी मंत्री रहेंगे। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट सदस्य सचिव होंगे। सदस्यों में जिला पुलिस अधीक्षक और जिला जेल अधीक्षक शामिल होंगे। समिति यह तय करेगी कि सम्मान राशि केवल उन्हें ही मिले जो मीसा या डीआईआर कानून के अधीन राजनीतिक या सामाजिक कारणों से निरुद्ध हुए थे तथा उनका तत्समय पुलिस रेकाॅर्ड में कोई आपराधिक या असामाजिक गतिविधियों का इतिहास नहीं था। समिति की अनुशंसा के आधार पर सम्मान राशि स्वीकृति आदेश को निरस्त करने की शक्ति जिला मजिस्ट्रेट को होगी।
सम्मान निधि पाने के लिए कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी नहीं देगा। यदि ऐसा होता है, सम्मान राशि या सुविधाएं मिलेंगी। यदि संबंधित व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई राशि वापस नहीं की जाती है तो उसे भू-राजस्व के बकाया की भांति वसूल किया जा सकेगा।
1 माह से कम या उसकी समतुल्य अवधि के लिए निरूद्ध्- 8,000 रुपए प्रतिमाह- 1 माह से अधिक किन्तु 5 माह से कम अवधि के लिए निरूद्ध - 15,000 रुपए प्रतिमाह
मीसाबंदी उन राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं को कहा जाता है, जिन्हें 1975 से 1977 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान 'मीसा' कानून के तहत जेल में डाल दिया गया था। इन्होंने उस दौरान आपातकाल लगाने का विरोध किया था। छत्तीसगढ़ में मीसाबंदियों को लोकतंत्र सेनानी का नाम दिया गया है।
Updated on:
30 May 2026 10:40 am
Published on:
30 May 2026 10:37 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
