
प्रसव में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन घटिया (Photo AI)
Fake Medicine: डिलीवरी के पहले प्रसव पीड़ा बढ़ाने व डिलीवरी के बाद ज्यादा खून बहने से रोकने के लिए लगाए जाने वाला इंजेक्शन ऑक्सिटोसिन घटिया निकला है। इसके अलावा 4 दवाएं नकली निकली हैं। ड्रग विभाग ने इसके उपयोग पर रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित फार्मास्यूटिकल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दवा दुकानदारों से संबंधित बैच व कंपनी की दवा को बेचने नहीं कहा है। खास बात ये है कि ये सीजीएमएससी से सप्लाई दवाइयां नहीं हैं। ये खुले बाजार में बिक रही दवाइयां हैं, जिसे लोग आंख मूंदकर अच्छी क्वालिटी की दवा समझकर खरीदते हैं।
भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (डीसीजीआई) के आदेश के बाद बाज़ार में उपलब्ध ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन की जांच स्टेट ड्रग लैब कालीबाड़ी में की गई। ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन आईपी, 5 आईयूएमएल बैच नंबर आई-7881 जांच में निम्न स्तर का निकला। लैब ने इसे गंभीर अवमानक श्रेणी में रखा है। हालांकि ड्रग विभाग ने इसका खुलासा नहीं किया कि इंजेक्शन किस कंपनी का है। कंपनी का नाम जाहिर नहीं करने से ये स्पष्ट होता है कि रिपोर्ट में पारदर्शिता की कमी है। दरअसल इस कंपनी की दूसरी बैच के इंजेक्शन सप्लाई में रहते हैं। घटिया निकली चार में तीन दवा पैरासिटामॉल का कांबिनेशन है।
ड्रग लैब की जांच में नाक्पेन-पी (असेक्लोफेनेक एवं पैरासिटामॉल् टैबलेट) बैच नंबर एमटी-250777 एक्सपायरी डेट अप्रैल 2027 है। यह मैटिन्स हैल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड सेक्टर 5 2ई सिडकुल हरिद्वार उत्तराखंड से सप्लाई हुई है। इसी तरह दूसरी दवा फ्लामो स्टार ऐपी टैबलेट (असेक्लोफेनेक एवं पैरासिटामॉल) बैच नंबर एसएआई-25029 एक्सपायरी डेट दिसंबर 2026 है। यह एनॉन फार्मास्यूटिकल ए-1 आरआईए हरसुलिया में बनी है। तीसरी दवा एसीएचई पी (असेक्लोफेनेक एवं पैरासिटामॉल टैबलेट्स) बैच नंबर एलवी25डीटी-066बी है। यह मार्च 2027 में एक्सपायर होगी। यह एलवी लाइफ साइंस वीपीओ गुरुमाजरा बद्दी सोलन हिमाचल प्रदेश में बनी है। चौथी दवा कोल्ड ज़िया टैबलेट है, जिसका बैच नंबर जीटी-25294ए है। यह जुलाई 2028 में एक्सपायर होगी। यह दवा गोविश रेमेडिस लिमिटेड यूनिट एक नालागढ़ सोलन हिमाचल में बनी है। ये सभी दवा जांच में निकली मिली है।
नकली दवा का मतलब ऐसी दवाओं से है, जो जानबूझकर व धोखाधड़ी करके असली दवा के रूप में बनाई या बेची जाती हैं। दिखने व पैकेजिंग में ये बिल्कुल असली दवा जैसी लगती हैं, लेकिन असल में इनमें मरीजों को नुकसान पहुंचाने वाले या बेअसर तत्व हो सकते हैं। इसमें असली दवा (सक्रिय तत्व) बहुत कम, जरूरत से ज्यादा या बिल्कुल नहीं होती है। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन के अनुसार कभी-कभी इनमें हानिकारक पदार्थ (जैसे सीमेंट, चॉक, या जहरीले रसायन) मिले होते हैं। बीमारी ठीक होने के बजाय मरीज की हालत बिगड़ सकती है या मौत तक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अच्छी कंपनी की दवा खरीदने में भलाई है।
Updated on:
30 May 2026 08:56 am
Published on:
30 May 2026 08:45 am
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