रायपुर

सुकमा में परिवर्तन रैली के बाद कांग्रेस नेताओं समेत 32 लोगों को गोलियों से भून डाला, जानें झीरम नरसंहार की पूरी कहानी

Jhiram Ghati Attack: देश के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड झीरम नरसंहार पर 13 साल बाद फैसला आया है। एनआईए कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। 25 मई को हुए झीरम नरसंहार से पूर देश हिल गया था..
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Updated: 5 Sep 2026, 3:34 PM IST
Jhiram case
घटनास्थल ( File Photo - Patrika )

Jhiram case: 25 मई 2013 इस तारीख को न्याय मिल गया है। एनआईए की विशेष न्यायलय ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि अभी सजा का ऐलान नहीं किया है। बता दें कि 25 मई को देश के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड को नक्सलियों ने अंजाम दिया था। वहीं आज आए फैसले से इस कांड में मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय मिला है। 25 मई को सुकमा में क्या हुआ था चलिए आपको झीरम नरसंहार की पूरी आपबीती बताते हैं..

Jhiram Ghati Attack: जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल, 2013 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने थे। रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस जीत के लिए जोर लगा रही थी। पार्टी पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा चला रही थी। 25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली की गई। रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर जा रहा था। इसमें करीब 25 गाड़ियां थीं। इन गाड़ियों में 200 नेता-कार्यकर्ता थे।

घटनास्थल की फोटो

सबसे आगे थे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल

सबसे आगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे। उनके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैदू की गाड़ी थी। उनके पीछे बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार चल रहे थे। यानी छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टॉप लीडरशिप इस काफिले में थी। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी में पहुंचा। यहीं नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया। गाड़ियां रुकते ही 200 से ज्यादा नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। करीब डेढ़ घंटे तक फायरिंग होती रही।

एक-एक को गोलियों से भून डाला

शाम करीब 5:30 बजे नक्सली पहाड़ों से उतरकर नीचे आए और एक-एक गाड़ी चेक की। एक गाड़ी में उन्हें सलवा जुडूम आंदोलन शुरू करने वाले महेंद्र कर्मा मिल गए। आंदोलन की वजह से नक्सली महेंद्र कर्मा को दुश्मन समझते थे। उन्होंने बेरहमी से महेंद्र कर्मा की हत्या कर दी। उन्हें करीब 100 गोलियां मारी गईं। चश्मदीदों के मुताबिक, नक्सलियों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें गोली मारी। हमला पूरी योजना के साथ किया गया। खुफिया एजेंसियों को हमले की कोई भनक नहीं थी।

30 से ज्यादा नेताओं की हत्या

इस घटना में नक्सलियों ने एक साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के कई नेताओं को मौत के घाट उतार दिया। मरने वालों में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्या चरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार सहित लगभग 30 से ज्यादा नेता, कार्यकर्ता और कई जवान शामिल थे। (Jheeram Valley attack) इतना बड़ा राजनीतिक नरसंहार देश में इससे पहले नहीं हुआ।

एनआईए ने क्लोजर में कहा था दहशत फैलाने की गईं हत्याएं

Jhiram Ghati Attack: साल 2013 में हुए झीरम नक्सली हमले की जांच की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने घटना के दो बाद ही 27 मई 2013 को एनआईए को सौंप दी। एनआईए ने इस मामले की पहली चार्ज सीट 24 सितंबर 2014 को विशेष अदालत में दाखिल की। इस मामले में 9 गिरफ्तार नक्सली सहित कुल 39 लोगों को आरोपी बनाया गया। इसके बाद 28 सितंबर 2015 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें 88 और आरोपियों के नामों को शामिल किया गया।

कोर्ट ने कही थी ये बात

इस मामले में जैसे ही चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई, अधूरी जांच, राजनीतिक दबाव, नक्सली लीडर्स को बचाने जैसे आरोप लगने शुरू हो गए। इसके बाद एनआईए की क्लोजर रिपोर्ट आई जिसमें कहा गया कि नक्सलियों ने दशहत फैलाने के लिए कांड को अंजाम दिया था। एनआईए को कोई अन्य एंगल इसमें नहीं मिला। इसके बाद 2018 में जब कांग्रेस की सरकार आई तो भूपेश बघेल ने जांच के लिए एसआईटी गठित की। एसआईटी की जांच चल ही रही थी कि इस पर हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया। इस तरह लंबी प्रक्रिया के बाद जब बस्तर से नक्सलियों का खात्मा हो गया और प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद एनआईए ने अंतिम बहस के बाद आखिरकार फैसला सुना दिया।

Updated on:
5 Sep 2026, 3:34 PM IST
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