
Chhattisgarh Employment News: बीटेक किया… नौकरी नहीं मिली। इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्रियां लीं… फिर भी खाली हाथ। पीएचडी तक की पढ़ाई पूरी कर ली… लेकिन आज भी रोजगार की तलाश जारी है। यह किसी एक-दो युवाओं की कहानी नहीं, बल्कि प्रदेश के उन लाखों शिक्षित और हुनरमंद युवाओं की कड़वी दास्तां है, जो डिग्री हाथ में लिए सालों से एक अदद नौकरी के लिए भटक रहे हैं।
'पत्रिका पड़ताल' में सामने आया है कि राज्य में उच्च शिक्षा और तकनीकी डिग्रियां हासिल करने वाले युवाओं की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन उस अनुपात में रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं हो पा रहे हैं। छत्तीसगढ़ कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के आधिकारिक आंकड़े इस कड़वी हकीकत की गवाही दे रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में प्रदेश के 7 लाख 22 हजार 942 युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत हैं।
उद्योग विभाग से लेकर कौशल विकास विभाग भले ही करोड़ों रुपए के निवेश और रोजगार सृजन के बड़े-बड़े दावे करते रहें, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि हजारों योग्य युवाओं को अब तक अपनी मंजिल नहीं मिल पाई है। बता दें कि कौशल विकास विभाग के पोर्टल पर 5वीं, 8वीं, 10वीं, 12वीं से लेकर स्नातक, स्नातकोत्तर, बीई, बीटेक, एमटेक, बीसीए, एमसीए, पीजीडीसीए, आईटीआई और इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक युवाओं ने पंजीयन कराया है।
पत्रिका पड़ताल के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि राज्य में औद्योगिक निवेश की सुस्त रफ्तार बेरोजगारी का सबसे बड़ा कारण है। पिछली सरकार के दौरान 1.27 लाख करोड़ रुपए के एमओयू हस्ताक्षरित होने का बड़ा दावा किया गया था, लेकिन इनमें से 10 प्रतिशत निवेश भी वास्तव में जमीन पर नहीं उतर सका। फाइलों में दर्ज जानकारी के अनुसार, 216 उद्योगों के साथ अनुबंध किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल 25 उद्योगों में ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाया। 2019-2024 की औद्योगिक नीति के अपेक्षित परिणाम न मिलने के बाद अब राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति 2024-2030 लागू की है, जिससे अब युवाओं को नए रोजगार मिलने की आस बंधी है।
जनवरी से मार्च 2024: 182280
अप्रैल 2024 से मार्च 2025: 261963
अप्रैल 2025 से मार्च 2026: 232731
अप्रैल 2026 से जून 2026: 45968
कुल पंजीकृत बेरोजगार: 722942
सरकारी नौकरी पर अति-निर्भरता: सरकारी तंत्र में सीमित सीटें होने के बावजूद अधिकांश युवाओं का केवल सरकारी भर्तियों के भरोसे बैठे रहना।
कमजोर स्टार्टअप और बिजनेस माहौल: युवाओं में रिस्क लेने की क्षमता की कमी और जमीनी स्तर पर मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम का अभाव।
आईटी और टेक क्लस्टर की कमी: मेट्रो शहरों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में आईटी, सॉफ्टवेयर, एआई और डेटा सेंटर जैसे आधुनिक तकनीकी उद्योगों का न होना।
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक डिग्री के साथ-साथ युवाओं को बदलते दौर के अनुसार अपनी स्किल अपडेट करनी होगी। आने वाले दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स एंड कंप्यूटिंग (जीपीयू), आईटी/आईटीईएस (आईटी/आईटीईएस) और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर्स में नौकरी की सबसे ज्यादा संभावनाएं बनेंगी।
स्किल्ड और नॉन-स्किल्ड सभी ट्रेड व एजुकेशन में पंजीकृत युवाओं के लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इंडस्ट्रीज और एमएसएमई सेक्टर के लिए एक नया पोर्टल भी विकसित हो रहा है। आने वाले समय में जिला और राज्य स्तर पर बड़े रोजगार मेलों का आयोजन कर युवाओं को अवसर दिए जाएंगे-बसवराजू एस., सचिव, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग