स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बस्तर संभाग के चार मलेरिया संवेदी जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के दुर्गम व दूरस्थ गांवों के 1 लाख 83 हजार 796 घरों में पहुंचकर मलेरिया की जांच की। चारों जिलों में 1 से 21 दिसंबर तक संचालित अभियान में कुल 9 लाख 30 हजार 820 लोगों की जांच की गई। इसमें पॉजिटिव पाए गए 7930 लोगों का तत्काल इलाज शुरू किया गया।
रायपुर. छत्तीसगढ़ को मलेरिया मुक्त बनाने चलाए जा रहे अभियान का सातवां चरण पूरा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बस्तर संभाग के चार मलेरिया संवेदी जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के दुर्गम व दूरस्थ गांवों के 1 लाख 83 हजार 796 घरों में पहुंचकर मलेरिया की जांच की। चारों जिलों में 1 से 21 दिसंबर तक संचालित अभियान में कुल 9 लाख 30 हजार 820 लोगों की जांच की गई। इसमें पॉजिटिव पाए गए 7930 लोगों का तत्काल इलाज शुरू किया गया। प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पिछले छह चरणों के अच्छे नतीजे आए हैं।
वर्ष 2018 में 2.63 वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) वाले छत्तीसगढ़ की एपीआई 2022 में घटकर 0.92 पर आ गई है। महामारी नियंत्रण के संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के सातवें चरण में स्वास्थ्य विभाग के 1959 सर्वे दलों द्वारा चारों जिलों में मलेरिया की जांच की गई। इन दलों को ग्राम स्तर, विकासखंड स्तर और जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया गया था। गांवों में घरों के आसपास जमा पानी और नालियों में डीडीटी व जले हुए तेल का छिड़काव किया गया।
जांच में लगातार कम होते गए मरीज
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर पहले चरण में 14 लाख 6 हजार, दूसरे चरण में 23 लाख 75 हजार, तीसरे चरण में 15 लाख 70 हजार, चौथे चरण में 19 लाख 98 हजार, पांचवें चरण में 14 लाख 36 हजार और छठवें चरण में 34 लाख 25 हजार लोगों की मलेरिया जांच की। इस दौरान पहले चरण में पॉजिटिव पाए गए 64 हजार 646, दूसरे चरण में 30 हजार 076, तीसरे चरण में 16 हजार 126, चौथे चरण में 9790, पांचवें चरण में 11 हजार 321 एवं छठवें चरण में 7180 मलेरिया पीड़ितों का तत्काल उपचार किया गया।