
Chhattisgarh School Admission: अनुराग सिंह की रिपोर्ट. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन रायपुर और बेमेतरा जिले की सीमा पर बसे गांवों के दर्जनों बच्चों का भविष्य अब भी अधर में लटका है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर, कक्षा नौवीं में प्रवेश का फैसला स्कूल प्रबंधन नहीं बल्कि स्थानीय सरपंच तय कर रहे हैं। 'पत्रिका पड़ताल' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बेमेतरा जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंडरका में रायपुर जिले के सीमावर्ती गांवों के बच्चों को दाखिला देने से साफ मना किया जा रहा है।
प्राचार्य और सरपंच एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालकर अभिभावकों को भटका रहे हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कंडरका का यह स्कूल वर्षों से रायपुर और बेमेतरा दोनों जिलों के सीमावर्ती गांवों के बच्चों के लिए आगे की पढ़ाई का एकमात्र और सबसे नजदीकी जरिया रहा है। इन गांवों में केवल आठवीं तक ही स्कूल होने के कारण छात्र इसी स्कूल पर निर्भर हैं।
जब अभिभावक दाखिला कराने पहुंचे, तो प्राचार्य ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि सरपंच ने मना किया है, पहले उनसे बात करें। वहीं, सरपंच ने दोटूक कह दिया कि बाहर के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस खींचतान का असर यह हुआ है कि रायपुर जिले के अंतिम छोर पर स्थित पठारीडीह गांव के बच्चे अब पढ़ाई छोड़ने या दूर जाने को मजबूर हैं। पिछले साल इस गांव से 48 बच्चों ने यहां प्रवेश लिया था, लेकिन इस बार दाखिला न मिलने के कारण कई छात्र उरला के दूरदराज स्कूलों में जा रहे हैं, तो कई बच्चे पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे गांवों में अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं।
पत्रिका पड़ताल के दौरान प्राचार्य के बयानों में बड़ा विरोधाभास मिला। ( Chhattisgarh News ) रायपुर क्षेत्र के कुछ रसूखदार लोगों के बच्चों के आने पर एक स्टाफ ने कहा कि अभी 80 बच्चे हो गए हैं, दो दिन बाद आना तो प्रवेश दे देंगे। दूसरी तरफ, आम अभिभावकों से प्राचार्य चेतना सिंह ने कहा कि नौवीं में 100 से अधिक दाखिले हो चुके हैं, इसलिए अब जगह नहीं है। स्कूल में अपने बेटे करण का दाखिला कराने भटक रही एक महिला ने बताया कि हफ़्ते भर पहले उन्हें सरपंच के पास भेजा गया था, और अब सीट फुल होने का बहाना बनाया जा रहा है।
डीईओइस गंभीर मुद्दे पर जब बेमेतरा के जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल से बात की गई, तो पहले उन्होंने नियम के तहत प्रवेश देने की बात कही। लेकिन जैसे ही मामला रायपुर जिले के बच्चों का आया, तो उन्होंने तानाशाही रवैया अपनाते हुए कह दिया कि हम दूसरे जिले के बच्चों को प्रवेश देंगे ही नहीं। यहां तक कि डीईओ ऑफिस से टीसी के बाद भी प्रवेश देने से उन्होंने साफ इंकार कर दिया।
अभिभावकों का कहना है कि जब वे बच्चों के प्रवेश के लिए स्कूल पहुंचे तो प्राचार्य ने उन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि सरपंच ने मना किया है, पहले उनसे बात कर लीजिए। इसके बाद जब अभिभावकों ने सरपंच से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि बाहर के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों से बात करते हैं। दोनों के अलग-अलग जवाब से अभिभावक असमंजस में हैं।
रायपुर जिला के अंतिम छोर में स्थित गांव पठारीडीह के स्कूल में पिछले साल 48 बच्चों ने प्रवेश लिया था। एक छात्रा ने बताया कि ज्यादातर क्लासमेट्स ने उरला या दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लिया है। कई लोग अपने मामा के यहां या दूसरे गांव भी अपने परिचित के यहां चले गए है। यहां प्रवेश नहीं दे रहे। हर साल प्रवेश देते थे इस बार पता नहीं क्यों मना कर रहे है।
इसी बीच रायपुर जिला एरिया के दो बच्चों के प्रवेश के लिए अभिभावक पहुंचे। उनके साथ सरपंच के कुछ लोग भी थे। इनके साथ प्राचार्य के पास गए एक व्यक्ति ने बताया कि प्राचार्य ने कहा है कि क्लास में 80 से ज्यादा बच्चे हो गए हैं। प्रवेश के लिए बहुत बच्चे आ रहे हैं, आज प्रवेश पूरा होने का नोटिस लगा देंगे, दो दिन बाद आना, तब प्रवेश कर देंगे। इससे यह सवाल खड़ा हो गया कि यदि सीटें पूरी भर चुकी हैं तो दो दिन बाद प्रवेश किस आधार पर दिया जाएगा। मामले में एक और विरोधाभास सामने आया। प्राचार्य ने दूसरे अभिभावकों से कहा कि नौवीं कक्षा में 100 से अधिक विद्यार्थियों का प्रवेश हो चुका है, इसलिए अब प्रवेश संभव नहीं है। दोनों बातों में अंतर होने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।
प्राचार्य चेतना सिंह का कहना है कि कक्षा 9वीं में 100 से ज्यादा बच्चों का प्रवेश हो चुका है, अब जगह नहीं है। हमें शिक्षकों की व्यवस्था भी देखनी पड़ती है।
कंडरका, सरपंच रोहित कुमार यदु ने कहा कि स्कूल में बैठने की जगह नहीं है। हमारे क्षेत्र के भालेसर, कंडरका और बेरला कला के बच्चों को प्राथमिकता है। बाहरी बच्चों को अपने क्षेत्र में जाने को कहा है।
लोक शिक्षण संचालनालय, उप संचालक, अशोक बंजारा ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। मैं इस संबंध में डीईओ से बात करता हूं।