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रायपुर के 30 से ज्यादा मोहल्ले फिर डूबेंगे! NHAI ने रखी ये तीन शर्तें, पत्रिका की पड़ताल में बड़ी लापरवाही उजागर

Raipur News: निगम-एनएचएआई की खींचतान का खामियाजा फिर से लोगों के लिए सिर दर्द बनाने वाला है। पत्रिका ने ग्राउंड में जाकर इसकी पड़ताल की है। जिसमें कई अहम बातों का खुलासा हुआ है..
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फिर डूबेंगे रायपुर के 30 से ज्यादा मोहल्ले ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh News: अजय रघुवंशी. प्रोफेसर कॉलोनी सहित वामनराव लाखे वार्ड की लगभग एक लाख की आबादी को इस मानसून में भी जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। वजह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रिंग रोड के बीचों-बीच नालियों के पानी को उस पार भेजने के प्रोजेक्ट में तीन शर्त रख दी है। पत्रिका ने अपनी पड़ताल में पाया कि 15 दिन पहले ही एनएचएआई ने नया अपटेड दिया है।

Raipur News: शर्त पर पूरा प्रोजेक्ट अटका

इसी शर्त पर अब पूरा प्रोजेक्ट अटका हुआ है। प्रोफेसर कॉलोनी सहित 30 से अधिक मोहल्लों के लिए यह बारिश फिर चुनौतीपूर्ण साबित होने वाली है, क्योंकि पानी निकलने का रास्ता ही नहीं है। रिंग रोड की नालियों से पानी उस पार चिंगरी नाला तक नहीं पहुंच पाता। इसे कनेक्ट करने के लिए रिंग रोड की बीचों-बीच खोदाई करके पानी को चिंगरी नाले से जोड़ना होगा।

NHAI की लापरवाही, रिंग रोड बनाया, नाला नहीं

सूत्रों के मुताबिक रिंग रोड निर्माण के समय ही बीचों-बीच नालियों के पानी को बड़े नाले से कनेक्ट किया जाना था। तब यह समस्या उसी समय लगभग 60-70 से प्रतिशत कम हो जाती। (Raipur News) रिंग रोड के इस पार जमा होने वाले पानी को नाले के उस पार स्थित चिंगरी नाले से जोड़कर स्थायी निकासी व्यवस्था तैयार करना चाहिए था, जो काम 15 साल पहले कर लिया जाना था। इस पर अभी योजना बनाई जा रही है।

प्रोफेसर कॉलोनी में जलभराव के प्रमुख कारण

  1. प्लाटिंग और कॉलोनी बनाने में पुराने नालों और प्राकृतिक ड्रेनेज चैनलों का खत्म होना।
  2. इससे बारिश का पानी अपने प्राकृतिक मार्ग से नहीं निकल पाता।
  3. कई स्थानों पर नालियां संकरी हैं, लेकिन क्षेत्र की क्षमता के मुताबिक नालियों का निर्माण नहीं।
  4. बारिश से पहले नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने पर उनमें गाद, प्लास्टिक और कचरा जमा होना।
  5. लो-लाइंग एरिया-प्रोफेसर कॉलोनी के कुछ हिस्से आसपास के क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थित हैं।
  6. मुख्य नालों और जल निकासी परियोजनाओं की कमी

ये हैं एनएचएआई की शर्त

  1. रिंग रोड में 1.2 मीटर गहराई से कवरिंग होनी चाहिए।
  2. एक छोर से ड्रिलिंग मशीन के जरिए पाइप पुशिंग से काम हो, न कि ओपन ट्रेंच एक्सेवेशन से।
  3. काम के दौरान लैब से थिकनेस रिपोर्ट लगातार प्रस्तुत हो।

ये हैं निगम का जवाब

  1. महाराजबंध तालाब से पानी प्रोफेसर कॉलोनी के रास्ते से आता है। पाइप को कनेक्ट करने के लिए गहराई का लेवल 0.9 मीटर है।
  2. पाइप पुशिंग से काम करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए रोड साइड काफी चौड़ी जगह चाहिए, साथ ही रिंग रोड से इस पार से उस पार पाइप पुशिंग के लिए हाईपॉवर ड्रिलिंग मशीन की जरूरत पड़ेगी।
  3. लैब थिकनेस रिपोर्ट से कोई दिक्कत नहीं है। इसे प्रस्तुत किया जा सकता है।

मेयर मीनल चौबे ने कहा कि रिंग रोड- नं.1, प्रोफेसर कॉलोनी जलभराव मामले में हमने एनएचएआई को प्रजेंटेशन सौंपा है। एनएचएआई ने तीन अलग-अलग बिंदुओं पर शर्त रखी है। इस संबंध में हमने पुन: डिटेल रिपोर्ट एनएचएआई को भेजा है। वर्तमान में जवाब का इंतजार है।

एनएचएआई, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, दिग्विजय सिंह ने कहा कि रिंग रोड से नाला कनेक्ट करने के लिए नगर-निगम से प्रस्ताव मिला है। इस संबंध में निगम के जवाब का अध्ययन करते हुए इस पर पुन: चर्चा करेंगे।

विधायक सुनील सोनी ने कहा कि प्रोफेसर कॉलोनी सहित आस-पास के अन्य क्षेत्रों में जलभराव खत्म करने व रिंग रोड से उस पार नाला कनेक्ट करने के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है। मैं नगर-निगम और एनएचएआई में एक बार फिर बात करता हूं, ताकि समस्या का शीघ्र निराकरण हो सके।