
Chhattisgarh Medical Colleges: 6 साल में 550+ ने छोड़ी नौकरी,(photo-patrika)
Chhattisgarh Medical Colleges: छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के लगातार नौकरी छोड़ने से फैकल्टी की कमी बढ़ती जा रही है। पिछले 6 सालों में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से 550 से ज्यादा डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ी है। इनमें नियमित और संविदा दोनों तरह के डॉक्टर शामिल हैं।
डॉक्टरों के नौकरी छोड़ने की प्रमुख वजह कम वेतन, समय पर प्रमोशन नहीं होना और ट्रांसफर का डर बताया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी का असर मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि फैकल्टी की कमी बनी रही तो मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एमबीबीएस सीटों पर भी असर पड़ सकता है।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन इसके अनुसार नया फैकल्टी सेटअप मंजूर नहीं किया गया है। 2022 के बाद इस साल पीएससी के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन चयनित डॉक्टरों को अभी तक पोस्टिंग आदेश का इंतजार है। 125 डॉक्टरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें करीब 60 डॉक्टरों का चयन हुआ है।
राजधानी के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में राज्य गठन के समय एमबीबीएस की 100 सीटें थीं। बाद में सीटों की संख्या बढ़ाकर 2019 में 180 और 2023 में 230 कर दी गई। हालांकि वर्तमान फैकल्टी सेटअप 150 सीटों के हिसाब से तैयार है। नई सीटों के अनुसार एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजिडेंट की संख्या बढ़ाने की जरूरत है।
प्रदेश के 10 मेडिकल कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रमोशन देकर प्रोफेसर बनाया गया। इसके करीब 20 दिन बाद जारी आदेश में रायपुर मेडिकल कॉलेज से 18 डॉक्टरों को बाहर भेज दिया गया। वहीं प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में करीब 80 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं हुआ है। 10 में से 4 मेडिकल कॉलेज फिलहाल प्रभारी डीन के भरोसे चल रहे हैं। इस साल 6 नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है, लेकिन वहां भी नियमित डीन की नियुक्ति नहीं हुई है।
मेडिकल कॉलेजों में स्वीकृत पदों की तुलना में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हुए हैं। प्रोफेसर के 241 स्वीकृत पदों में 117 पद रिक्त हैं, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर के 399 पदों में 196 पद खाली हैं। इसी तरह असिस्टेंट प्रोफेसर के 644 पदों में 332 पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं सीनियर रेजिडेंट के 518 पदों में 375 पद खाली हैं। बड़ी संख्या में फैकल्टी और मेडिकल स्टाफ के पद खाली होने से मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई, प्रशिक्षण और मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में स्वशासी समिति के माध्यम से भर्ती होने के कारण वहां समय पर प्रमोशन और करीब 10 प्रतिशत इंक्रीमेंट जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इसके चलते कई डॉक्टर वहां के विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ में करीब 110 प्रोफेसर डीन और अधीक्षक बनने के लिए पात्र हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ जगहों पर जूनियर पदों पर कार्यरत डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी गई है।
मेडिकल एजुकेशन विभाग का कहना है कि नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी भर्ती की प्रक्रिया जारी है। जिन 5 प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली थी, उनके लिए अपील की गई है और निरीक्षण भी हो चुका है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के कमिश्नर रितेश अग्रवाल ने कहा कि विकल्प मिलने पर डॉक्टर नौकरी छोड़ रहे हैं। नए मेडिकल कॉलेजों के लिए लगातार फैकल्टी की भर्ती की जा रही है।
Published on:
28 Jun 2026 11:59 am
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