रायपुर। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में नए आपराधिक कानून लागू किया है। नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के सेक्शन 51 व 52 के अनुसार किसी भी पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर जैविक नमूने एकत्र किए जा सकेंगे।
रायपुर। मेडिकल कॉलेज संबद्ध समेत सभी जिला अस्पतालों व सीएचसी में मेडिको लीगल केस व पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी ऑनलाइन देना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई जरूरतमंद पीएम रिपोर्ट के लिए अभी भी चक्कर लगा रहे हैं। एनआईसी ने एक ऐप तैयार किया है। इसी ऐप में एमएलसी व पीएम की रिपोर्टिंग ऑनलाइन करनी है। ऐसा करने से पुलिस विभाग भी अपडेट रह सकेगा।
तत्कालीन एसीएस हैल्थ मनोज पिंगुआ ने पिछले साल सितंबर में स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े सभी अधिकारियों को ऐप का उपयोग करने को कहा था। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में नए आपराधिक कानून लागू किया है। नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के सेक्शन 51 व 52 के अनुसार किसी भी पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर जैविक नमूने एकत्र किए जा सकेंगे। पंजीकृत डॉक्टर यानी आरएमपी भी जैविक नमूने एकत्र कर सकते हैं।
यही नहीं, वे इसका परीक्षण भी कर सकते हैं। जरूरी होने पर एक से अधिक बार या अन्य परीक्षण का सुझाव भी दे सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो ने सुझाव दिया है कि पुलिस अधिकारी एमएलसी एग्जामिनेशन व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए स्वास्थ्य विभाग को ऑनलाइन अनुरोध कर सकता है। इसके लिए एप एमईडीएलईएपीआर तैयार है। इसका उपयोग देशभर के पुलिस विभाग कर रहे हैं। इससे पुलिस को भी डेटा एकत्रित करने में आसानी होगी।
पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में उपयोग
ऐप वेब आधारित है। इसका उपयोग पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, चंडीगढ़ यूटी समेत कई राज्य कर रहे हैं। है। ऐप के उपयोग से बेहतर परिणाम भी मिला है। ये ऐप अस्पतालों के लिए नेट व जावा दोनों में डेवलप किया गया है। इस एप्लीकेशन का उपयोग करके अस्पताल पुलिस विभाग को ऑनलाइन सूचना दे सकते हैं। इस एप्लीकेशन का उपयोग सभी अस्पताल जैसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी व सिविल अस्पताल करेंगे। इससे स्वास्थ्य व पुलिस विभाग के बीच डेटा का वास्तविक आंकड़ा पहुंच सकेगा।
मृतक के परिजन होते हैं परेशान, क्लेम रूकता है
वर्तमान में पुलिस विभाग को पीएम रिपोर्ट के लिए अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं मृतक के परिजन भी इसके लिए पुलिस थानों का चक्कर लगाते देखे जा सकते हैं। केस एमएलसी या सामान्य, यह अस्पताल जाने के बाद ही पता चलता है। कोई विवादित केस या सड़क दुर्घटना वाले केस एमएलसी होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एप्लीकेशन का उपयोग करने से न केवल पुलिस विभाग, वरन आम लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। पीएम रिपोर्ट नहीं मिलने से परिजनों के कई काम रूक जाते हैं। जैसे इंश्योरेंस संबंधी क्लेम पीएम रिपोर्ट के बाद ही किया जा सकता है।