Raipur AIIMS Hospital: फूलो देवी नेताम ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस गंभीर स्थिति को उठाते हुए कहा कि संस्थान में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Raipur AIIMS Hospital: छत्तीसगढ़ के रायपुर AIIMS में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। फूलो देवी नेताम ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान इस गंभीर स्थिति को उठाते हुए कहा कि संस्थान में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि कई बार गंभीर मरीजों को भर्ती के लिए लाया जाता है, लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर उन्हें वापस कर दिया जाता है या फिर Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital (मेकाहारा) रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स रायपुर की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सांसद नेताम ने सदन को जानकारी दी कि एम्स रायपुर में चिकित्सकों के कुल 305 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 190 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यानी 115 पद खाली पड़े हैं। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और सर्जरी जैसे अहम विभागों में सबसे ज्यादा कमी है, जिससे गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
एम्स रायपुर में नर्सिंग, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कुल 3,884 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 2,387 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, यानी 1,497 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कमी का सीधा असर अस्पताल की सेवाओं पर पड़ रहा है।
ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है, ऑपरेशन तय समय पर नहीं हो पा रहे हैं और जरूरी जांच प्रक्रियाओं में भी देरी हो रही है। नतीजतन मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए अतिरिक्त इंतजार और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फूलो देवी नेताम ने केंद्र सरकार से मांग की कि एम्स रायपुर में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ के सभी रिक्त पदों को जल्द भरा जाए। साथ ही, बेड क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ेगा।