रायपुर

छत्तीसगढ़ में सालाना 1 लाख यूनिट खून की कमी, निजी ब्लड बैंक और अस्पताल वाले कर रहे मनमानी, पत्रिका का बड़ा खुलासा

Chhattisgarh News: प्रदेश में मरीजों को सालाना 3 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है। सामने आए रिपोर्ट से पता चला है कि साल में मुश्किल से 1.75 से 2 लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाता है...

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Jun 14, 2026
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छत्तीसगढ़ में खून की किल्लत ( File Photo )

World Blood Donor Day: पीलूराम साहू. हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करना और जरूरतमंदों की जान बचाने के लिए स्वैच्छिक दाताओं को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, प्रदेश की स्थिति इस दिशा में चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मरीजों को सालाना 3 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, जबकि मुश्किल से 1.75 से 2 लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाता है।

Chhattisgarh News: इन मरीजों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

रक्त की इस भारी कमी का सीधा खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें सिकलसेल, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, कैंसर, प्रसव या दुर्घटना के दौरान तुरंत ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र की कुल आबादी का कम से कम एक फीसदी रक्त संग्रहण अनिवार्य है। प्रदेश में इस लक्ष्य की प्राप्ति न होने के कारण स्थिति विषम हो गई है।

कई निजी ब्लड बैंक और अस्पताल कर रहे मनमानी

इसका सबसे बुरा असर उन मरीजों पर पड़ता है जो इमरजेंसी में होते हैं। रक्त की कमी का फायदा उठाते हुए कई निजी ब्लड बैंक और अस्पताल मनमानी कर रहे हैं। नियमतः एक यूनिट होल ब्लड की सरकारी कीमत 1250 रुपए निर्धारित है, लेकिन निजी संस्थान आपातकाल के नाम पर मरीजों से 3000 से 3500 रुपए तक वसूल रहे हैं। प्रदेश में 120 से अधिक ब्लड बैंक संचालित हैं, जिनमें से कई मानकों पर खरे नहीं उतरते और उन पर लगाम लगाने वाली निगरानी तंत्र भी फिलहाल सुस्त दिखाई देता है।

भ्रांतियों के कारण रक्तदान से दूरी

रायपुर में आंबेडकर अस्पताल और रेडक्रॉस सोसाइटी के रूप में मात्र दो मुख्य सरकारी ब्लड बैंक हैं, जबकि निजी बैंकों की संख्या अधिक है। युवाओं और स्वस्थ नागरिकों के बीच रक्तदान को लेकर अभी भी शारीरिक कमजोरी जैसी कई भ्रांतियां व्याप्त हैं। ( Chhattisgarh News ) जबकि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में रक्तदान कर सकता है, जिससे न केवल शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, हृदय रोगों और कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम भी कम होता है।

दुर्लभ ब्लड ग्रुप की चुनौती

सीनियर पैथोलॉजिस्ट डॉ. विजय कापसे और रक्त रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल के अनुसार, देश में आरएच नेगेटिव ब्लड ग्रुप महज 5 से 10 फीसदी लोगों में ही पाया जाता है। विशेषकर बॉम्बे ब्लड ग्रुप तो अत्यंत दुर्लभ है, जो दुनिया में मात्र 0.04 फीसदी लोगों में मिलता है। भारत में ऐसे लोगों की संख्या अत्यंत सीमित है, जिसके कारण इन ग्रुप्स के मरीजों के लिए रक्त जुटाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

श्री बालाजी मेडिकल काॅलेज चेयरमैन डॉ. देवेंद्र नायक ने कहा कि नियमित अंतराल में ब्लड डोनेशन करने से खून साफ होने के साथ शरीर को नए खून बनाने का मौका मिलता है। कैंसर जैसे गंभीर बीमारियों से बचाव भी होता है। यह मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद है। सिकलसेल, हीमोफीलिया समेत गंभीर मरीजों को रक्तदान से ब्लड मिलता है। इसलिए स्वस्थ लोगों को नियमित रक्तदान करना चाहिए।

Updated on:
14 Jun 2026 02:43 pm
Published on:
14 Jun 2026 02:42 pm