CG News: सुदूर वनांचल में बसे बैगा आदिवासियों के लिए यह गर्मी केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। विकास के तमाम दावों के बीच, कवर्धा का बैगा अंचल आज एक-एक घूंट पानी के लिए तरस रहा है।
CG News: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का बैगा अंचल हर साल गर्मी आते ही भीषण जल संकट से जूझने लगता है। पंडरिया ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों—धूड़सी, नवाटोला, रुखमीदादर और शीतलपानी—में पेयजल की उपलब्धता लगभग खत्म हो जाती है। हैंडपंप सूख जाते हैं और नल-जल योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजाना कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है।
कबीरधाम जिले के सुदूर वनांचल में बसे बैगा आदिवासियों के लिए यह गर्मी केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। विकास के तमाम दावों के बीच, कवर्धा का बैगा अंचल आज एक-एक घूंट पानी के लिए तरस रहा है। यहां पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि एक ऐसी दैनिक जद्दोजहद है, जिसने महिलाओं, बुजुर्गों और मासूम बच्चों का बचपन पहाड़ियों और जंगलों के रास्तों में कैद कर दिया है।
पंडरिया ब्लॉक के धूड़सी, नवाटोला, रुखमीदादर और शीतलपानी जैसे दर्जनों गांवों की जमीनी हकीकत भयावह है। यहां के हैंडपंप महीनों से हवा उगल रहे हैं और नल-जल योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं। भीषण तपिश में महिलाएं सिर पर बर्तन रखे 2 से 3 किलोमीटर का पथरीला सफर तय करने को मजबूर हैं।
छीरपानी और बांसाटोला जैसे इलाकों में जब प्यास बर्दाश्त से बाहर हो जाती है, तो ग्रामीण जमीन खोदकर 'झिरिया' (छोटा गड्ढा) बनाते हैं। घंटों इंतजार के बाद इस गड्ढे में रिसकर जो मटमैला पानी जमा होता है, वही इन आदिवासियों की प्यास बुझाता है। यह पानी न तो स्वच्छ है और न ही सुरक्षित, जिससे अंचल में जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
विडंबना देखिए कि बाहपानी, देहानटोला और धूड़सी में सौर ऊर्जा संचालित पानी टंकियां तो खड़ी हैं, लेकिन वे पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ी हैं। कहीं मोटर जल चुकी है, तो कहीं पाइपलाइन जर्जर है। विभाग की अनदेखी और ठेकेदारों की लापरवाही का खामियाजा सीधा बैगा परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। गिरता जलस्तर और वनों की कटाई ने इस संकट को और अधिक गहरा कर दिया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता दिलीप राजपूत का कहना है कि हैंडपंपों की मरम्मत और पाइप विस्तार का कार्य किया जा रहा है। मगर सवाल यह उठता है कि हर साल गर्मी में यही स्थिति क्यों दोहराई जाती है। जब तक सरकारी फाइलें हकीकत के धरातल पर नहीं उतरतीं, तब तक बैगा अंचल की यह जल-जंग जारी रहेगी।