रायपुर

5 दशक बाद जंगलों में लौटा काला हिरण! बारनवापारा से 25 Black Buck गोमर्डा में होंगे आजाद, PM मोदी भी कर चुके हैं जिक्र

Baranwapara Wildlife Sanctuary: छत्तीसगढ़ के जंगलों में काले हिरणों के संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी पहल होने जा रही है। बारनवापारा अभयारण्य से 25 काले हिरणों (ब्लैक बक) को गोमर्डा अभयारण्य के जंगलों में छोड़े जाने की तैयारी है।
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Sep 14, 2026
Chhattisgarh Black Buck
25 ब्लैक बक होंगे आजाद (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Black Buck: बारनावपारा अभयारण्य से जल्दी ही 25 काले हिरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले गोमर्डा अभयारण्य में छोड़े जाएंगे। इनको अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में छोड़ने की योजना बनाई गई है। बार के बाड़े से इसे शिफ्ट कर गोमर्डा ले जाएगा। जहां मंत्री केदार कश्यप की उपस्थिति में हिरणों को खुले स्थान पर छोडा़ जाएगा। बता दें कि इस समय बारनवापारा में 80 से ज्यादा काले हिरण हैं।

राज्य में 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों का संरक्षण-संवर्धन करने 2019 में 70 हिरण लाए गए थे। इसमें से दिल्ली के राष्ट्रीय उद्यान से 50 और बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल उद्यान से 27 यानी कुल 77 काले हिरण शामिल हैं। इनकी संख्या में इजाफा होने पर 60 को बारनवापारा अभयारण्य में छोड़ा गया है। इसमें सबसे पहले फरवरी 2022 में 14 और इसके बाद 2024 और फरवरी 2026 में 34 छोड़े गए थे।

इसलिए संख्या में इजाफा हुआ

राज्य वन्यजीव बोर्ड की नौवीं बैठक में अप्रैल 2018 में आयोजित पुनर्स्थापन योजना को स्वीकृति मिलने के बाद स्थिति में बदलाव आया। इसके बाद एक योजना के तहत काले हिरणों को फिर से बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई। संरक्षण के शुरुआती चरण में कई चुनौतियां सामने आईं। प्रथम चरण में निमोनिया के कारण लगभग आठ काले हिरणों की मृत्यु हुई, जिसके बाद प्रबंधन प्रणाली में सुधार किए गए। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप काले हिरणों की आबादी पहले स्थिर हुई और फिर धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

बेहतर पोषण, नियमित निगरानी और अनुकूल वातावरण के कारण इनकी संख्या में इजाफा हुआ। करीब पांच दशकों तक काले हिरण विलुप्त रहे। इसके बाद तमाम प्रयासों के परिणामस्वरूप उनकी संख्या बढ़कर लगभग 200 तक पहुंची और इस सफलता को प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उल्लेखित किया गया।

विलुप्ति की कगार पहुंचे

प्रदेश के जंगलों से काले हिरण पूरी तरह गायब हो गए थे। उन्हें केवल 1980 के दशक के बाद इन्हें केवल चिड़ियाघरों में ही देखा जा सकता था। वन विभाग ने इन्हें वापस जंगल में बसाने का लक्ष्य तय किया। लेकिन यह आसान नहीं था। पालतू वातावरण में पले हिरणों को जंगल के खतरों, भोजन और जीवनशैली के अनुकूल बनाना बड़ी चुनौती थी। कई वर्षों की कोशिशों के बाद अब काले हिरण फिर से प्राकृतिक परिवेश में खुद को ढालने में सफल हुए हैं।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

काले हिरणों को बसाने की पहली कोशिश में दिल्ली चिड़ियाघर से लाए गए हिरणों को जंगल में छोड़ा गया था। लेकिन वे जीवित नहीं रह सके और धीरे-धीरे खत्म हो गए। इसके बाद रणनीति बदली गई और बिलासपुर के कानन पेंडारी से लाए गए हिरणों को नियंत्रित तरीके से जंगल में छोड़ा गया। इस बार उन्हें बेहतर तरीके से अनुकूलन का समय और वातावरण मिला, जिससे वे जंगल में रहना सीख गए।

शिफ्ट किया जाएगा

अरुण कुमार पाण्डेय, पीसीसीएफ एवं वनबल प्रमुख के मुताबिक, काले हिरणों को जल्दी ही गोमर्डा अभयारण्य में शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर तैयार चल रही है। वनमंत्री केदार कश्यप की अनुमति मिलते ही अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इसे छोड़ने की योजना बनाई गई है।

Updated on:
14 Sept 2026 08:32 pm
Published on:
14 Sept 2026 08:23 pm