
CGPSC (photo-patrika)
CGPSC Paper Leak: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से जुड़े कथित पर्चा लीक और चयन अनियमितता मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ओएसडी बताए जा रहे और वर्तमान में अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। बलरामपुर से गिरफ्तारी के बाद चेतन फिलहाल ED की रिमांड पर हैं। उनसे कथित आर्थिक लेन-देन और चयन प्रक्रिया से जुड़े मामलों को लेकर पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, ED अब उन अभ्यर्थियों और अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है, जिनसे कथित तौर पर चेतन बोरघरिया तक रकम पहुंचने की बात सामने आई है। एजेंसी ने विकास चंद्राकर और उत्कर्ष चंद्राकर के माध्यम से चेतन को कथित रूप से रकम देने वाले अभ्यर्थियों सहित करीब 12 लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया है। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उनसे मामले से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर पर्चा उपलब्ध कराने और चयन में मदद के नाम पर वसूले गए करीब 3.2 करोड़ रुपए में से कितनी रकम चेतन बोरघरिया तक पहुंची। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि यदि रकम उनके पास पहुंची तो उसे आगे किन लोगों तक भेजा गया। हालांकि, रकम के अंतिम प्रवाह को लेकर जांच अभी जारी है।
इससे पहले ED की टीम ने धमतरी स्थित चेतन बोरघरिया के पैतृक निवास पर छापेमारी की थी। इस दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। एजेंसी इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले तथ्यों के आधार पर भी पूछताछ कर रही है।
ED ने वर्ष 2019 से 2023 के बीच आरोपियों और संदिग्ध लोगों की कॉल डिटेल और चैट की भी पड़ताल की है। दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले कुछ चैट में कथित तौर पर पैसों के लेन-देन, पर्चा उपलब्ध कराने और इंटरव्यू में मदद से संबंधित बातचीत का उल्लेख मिला है। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों से सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।
जांच एजेंसी विकास, अनिल और उत्कर्ष चंद्राकर की कथित भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों और प्रभावशाली लोगों के बीच संपर्क किस तरह स्थापित हुआ और कथित रकम का लेन-देन किस माध्यम से किया गया।
दूसरी ओर ED ने कारोबारी श्रवण कुमार गोयल, सेवानिवृत्त IAS टामन सिंह सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी आरती वासनिक और ललित गणवीर समेत अन्य आरोपियों की संपत्तियों का ब्योरा जुटाने का दावा किया है। इन संपत्तियों को अटैच करने के लिए अदालत में आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
ED का दावा है कि जांच के दौरान कुछ संपत्तियों के कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़े होने के साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से प्राप्त जानकारी और अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के आधार पर मामले को आगे बढ़ा रही है। फिलहाल वित्तीय लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाशने का काम जारी है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
Updated on:
14 Sep 2026, 2:04 PM IST
Published on:
14 Sep 2026, 2:02 PM IST
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