
जैन समाज युवाओं से कर रहा सीधा संवाद ( Photo - Patrika and AI )
Chhattisgarh News: शादी को लेकर बदलती युवा सोच के बीच जैन समाज ने अब रिश्ते तय करने के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर युवाओं से सीधे संवाद की पहल शुरू की है। ( Chhattisgarh News ) शादी नहीं करना चाह रहे युवाओं को समझाने के बजाय उनकी सोच जानने, उन्हें विवाह और पारिवारिक जीवन के सकारात्मक पहलुओं से परिचित कराने और समान सोच वाले साथी को समझने का अवसर देने के लिए परिणय पथ कार्यक्रम तैयार किया गया है।
भारतीय जैन संगठना के स्टेट मेट्रिमोनी हेड व पूर्व राज्य अध्यक्ष प्रमाेद लुनावत ने बताया कि समाज की इस पहल में शुरुआत में 25 लड़के और 25 लड़कियों को शामिल किया जाएगा। इन्हें एक साझा कार्यक्रम में बुलाकर एक्सपर्ट टीम के माध्यम से विवाह, रिश्तों, जिम्मेदारियों और बदलते पारिवारिक परिवेश पर संवाद कराया जाएगा। युवाओं को एक-दूसरे से बातचीत करने और पसंद-नापसंद, सोच तथा जीवन के लक्ष्यों को समझने का अवसर भी मिलेगा। युवा खुद चुनेंगे तो उनकी रुचि भी बढ़ेगी। यदि दो युवाओं के बीच आपसी सहमति और रुचि बनती है, तो आगे दोनों परिवारों को बातचीत में शामिल किया जाएगा।
इस पहल की खास बात यह है कि यहां केवल रिश्ते दिखाने या परिवारों के बीच परिचय कराने पर जोर नहीं है। युवाओं को खुद निर्णय लेने के लिए पर्याप्त संवाद का अवसर देने की योजना है। समाज का मानना है कि आज की पीढ़ी जीवनसाथी के मामले में केवल पारिवारिक पसंद नहीं, बल्कि समान सोच, करियर, जीवनशैली और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी महत्व देती है। ऐसे में विवाह के लिए दबाव बनाने के बजाय संवाद जरूरी है।
प्रमोद लुनावत ने बताया कि समाज ने इस पहल में अभिभावकों को भी जोड़ा है। शादी नहीं करना चाह रहे युवाओं के माता-पिता की काउंसिलिंग कर उन्हें यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चों से बातचीत करते समय केवल अपनी अपेक्षाएं रखने के बजाय उनकी सोच और भावनाओं को समझना भी जरूरी है। काउंसलिंग में अभिभावकों को बच्चों से संवाद करने, उनकी प्राथमिकताओं को समझने और विवाह जैसे महत्वपूर्ण फैसले पर उन्हें विश्वास में लेने के तरीके बताए जा रहे हैं। संगठना उद्देश्य है कि पीढ़ियों के बीच संवाद बढ़े और शादी का फैसला दबाव के बजाय आपसी सहमति से हो।
संगठना के नेशनल सेक्रेटरी डॉ पंकज चोपड़ा ने बताया कि देश में शादी को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। बड़ी संख्या में युवा पहले करियर, आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं और विवाह को टाल रहे हैं। रिसर्च के अनुसार, लगभग 25 फीसदी युवा शादी नहीं करना चाह रहे है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है। इसलिए शादी को लेकर समाज की ओर से पहल की गई है। साथ ही प्री मैरिज के साथ ही पोस्ट मैरिज, कपल और तलाक लेने वालों के लिए भी कार्यक्रम शुरु किए गए है।
Updated on:
14 Sept 2026 10:14 am
Published on:
14 Sept 2026 10:14 am
