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पत्रिका की खबर का असर: हाईवे पर 500 गड्ढों की मरम्मत शुरू, लेकिन गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

Highway Pothole Repair: रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर गड्ढों और जर्जर सड़क को लेकर ‘पत्रिका’ की ग्राउंड रिपोर्ट का असर हुआ है। रिपोर्ट के बाद एनएचएआई ने हाईवे पर करीब 500 गड्ढों की मरम्मत और पेंचवर्क शुरू कराया है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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हिमांशु शर्मा

Sep 13, 2026

Poor Road Condition Raipur Bilaspur Highway 3000 Patchworks

सड़क बदहाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@हिमांशु शर्मा।Raipur-Bilaspur Highway: रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर जानलेवा गड्ढों और घटिया सड़क की स्थिति को लेकर 'पत्रिका' द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट का बड़ा असर हुआ है। खबर सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की नींद टूटी और उसने आनन-फानन में हाईवे के करीब 500 गड्ढों को भरने और पेंचवर्क का काम शुरू करा दिया है।

हालांकि, मरम्मत के नाम पर की जा रही लीपापोती से काम की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यह सुधार कम और महज औपचारिकता ज्यादा नजर आ रहा है। गिट्टी और डामर डालकर गड्ढों को ऊपर-ऊपर भरा जा रहा है, जो अगले दो-चार दिनों में फिर उखड़ जाएंगे। हाईवे पर पहले से किए गए 3000 से अधिक पेंचवर्क हर दिन उखड़ रहे हैं। टू-व्हीलर चालकों के लिए ये फिसलन भरे पेंचवर्क और भी खतरनाक साबित हो रहे हैं। सिलतरा, धरसींवा, तरपोंगी और बेमता जैसे डेंजर जोन (ब्लैक स्पॉट्स) पर स्थिति बेहद बदतर है।

टोल की वसूली पूरी, सफर जोखिम भरा

अधिकारियों का कहना है कि बारिश खत्म होने के बाद सड़क का स्थाई और गुणवत्तापूर्ण निर्माण किया जाएगा। दूसरी ओर, राहगीरों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि टोल तो पूरा वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें जर्जर सड़क, गड्ढे, अंधेरा और हादसों का जोखिम मिल रहा है। 'पत्रिका' के खुलासे के बाद मरम्मत तो शुरू हुई है, लेकिन जब तक ठोस और स्थायी निर्माण नहीं होता, तब तक हादसों का खतरा बना रहेगा।

रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर मौत का सफर?

बता दें कि रायपुर से बिलासपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-130 की बदहाली को लेकर 'पत्रिका' द्वारा चलाए जा रहे जनहित अभियान के तहत बुधवार को हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद जब जमीनी पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। खुलासा हुआ कि 124 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर तीन हजार से ज्यादा जगहों पर घटिया पेचवर्क किया गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण ये पेचवर्क बनने के अगले ही दिन उखड़ने लगे हैं, जिससे यह हाईवे कम और हादसों का जाल ज्यादा नजर आ रहा है।

घटिया मरम्मत के कारण हाईवे समतल होने के बजाय पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। कई स्थानों पर पेचवर्क को जिक-जैक और सांप-सीढ़ी की तरह टेढ़ा-मेढ़ा छोड़ दिया गया है। इससे सबसे अधिक परेशानी टू-व्हीलर चालकों को हो रही है। पेचवर्क वाले हिस्सों में पहुंचते ही दोपहिया वाहन अनबैलेंस हो रहे हैं, जिससे चालकों के गिरने और गंभीर हादसे का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। वहीं, फोर-व्हीलर वाहनों को भी तेज झटके लग रहे हैं।