CBSE Student: अब प्रदेश स्तरीय खेलों में अब सीबीएसई स्कूल के विद्यार्थी भी भाग ले सकेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ ने इस संदर्भ में आदेश जारी किया है।
Raipur News: लोक शिक्षण संचालनालय ने बुधवार को शालेय खेलों में सीबीएसई विद्यार्थियों को नहीं शामिल करने का फैसला बदल दिया। नए आदेश के अनुसार, इस वर्ष शालेय खेलों में सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों को खेलने का मौका दिया जाएगा। आयोजन भी सीबीएसई स्कूलों में किया जा सकेगा।
लोक शिक्षण संचालनालय ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के विरोध के बाद और सीबीएसई विद्याथ्रियों के हित को देख्ते हुए अपना फैसला बदला है। इस फैसले के बाद सीबीएसई स्कूल के हजारों बच्चों को ब्लॉक, जिला, संभाग और राज्य स्तरीय शालेय खेल प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका मिलेगा।
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने लोक शिक्षण संस्थान को पत्र लिखकर बताया कि स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीआईएफ) ने इस वर्ष सीबीएसई को एक अलग इकाई के रूप में मान्यता दे दी है, लेकिन अब तक सीबीएसई ने खेलों को लेकर कोई सेटअप तैयार नहीं किया है। इसलिए जब तक सीबीएसई का सेटअप तैयार नहीं हो जाता, तब तक शालेय खेलों में सीबीएसई विद्यार्थियों को शामिल होने का मौका मिलना चाहिए। इसीलिए लोक शिक्षण संचालनालय ने एक वर्ष के लिए सीबीएसई स्कूलों को दोबारा शालेय खेलों में शामिल किया है।
प्रदेशभर के सीबीएसई स्कूलों में 6 लाख बच्चे पढ़ते हैं, जिसमें से हजारों बच्चे हर साल शालेय प्रतियोगिता में उतरते हैं और पदक जीतते हैं। शिक्षा विभाग के शालेय खेलों में सीबीएसई विद्यार्थियों को मौका देने के निर्णय से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। साथ ही लोक शिक्षण संचालनालय के खेल बजट में भी इजाफा होगा। सीबीएसई स्कूल वाले हाईस्कूल के प्रत्येक बच्चे के खेलने पर 50 रुपए और हॉयर सेकंडरी के प्रत्येक बच्चे पर 65 रुपए खेल शुल्क के रूप में लोक शिक्षण संचालनालय को देते हैं, जिससे लगभग 1 करोड़ से ज्यादा का बजट लोक शिक्षण संचालनालय को प्राप्त होता है।
शालेय खेलों से सीबीएसई स्कूलों को अलग करने का पीटीआई भी विरोध कर रहे थे। इसका कारण था कि कई निजी स्कूलों के पीटीआई के सहयोग से शालेय खेलों का आयोजित किया जा रहा था, लेकिन सीबीएसई स्कूलों के अलग होने से आयोजन कराने का सारा लोड सरकारी स्कूलों के पीटीआई पर आ जाता, जिसका विरोध हो रहा था। क्योंकि सरकारी स्कूलों में पीटीआई के कई पद खाली पड़े हैं।