प्रदेश के १७ जिले हाथियों के आंतक से प्रभावित हैं। पिछले पांच वर्षों में २०० लोगों की मौत हो चुकी है और ७ हजार घरों को नुकसान पहुंचा है।
रायपुर . जंगली हाथियों के आतंक की आंच से बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा भी गरम रही। सरगुजा संभाग के विधायकों नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव, अमरजीत भगत और डॉ. प्रीतम राम ने ध्यानाकर्षण के जरिए यह मसला उठाया। उनका कहना था कि सरकार को लोगों के जान-माल की चिंता ही नहीं है। हाथियों के हमले से जनहानि, मकान, फसल और दूसरी परिसंपत्तियों के नुकसान को रोकने में सरकार असफल रही है।
वन मंत्री महेश गागड़ा ने माना कि प्रदेश के १७ जिले हाथियों के आंतक से प्रभावित हैं। पिछले पांच वर्षों में २०० लोगों की मौत हो चुकी है और ७ हजार घरों को नुकसान पहुंचा है। लेकिन, उन्होंने इसे सरकार की उदासीनता मानने से इनकार कर दिया। उनका कहना था, सरकार हाथियों को नियंत्रित करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम कर रही है। उन्होंने जनजागरुकता की बात बताई। जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, लोगों को जागरुक करने से क्या हाथी का आना रुक जाएगा। हाथी उनको नहीं कुचलेगा, घर नहीं तोड़ेगा अथवा फसलों को नहीं रौंदेगा। सरकार को जंगली हाथियों को पकड़कर उन्हें अभ्यारण्यों में भेजना चाहिए। वन मंत्री ने कर्नाटक से पांच कुमकी हाथी मंगाकर बदमाश हाथियों को पकडऩे और उनमें रेडियो कॉलर लगाने की बात कही। महासमुंंद विधायक विमल चोपड़ा ने कहा, सरकार जितना प्रयास कर रही है, हाथियों का उत्पात उतना क्यों बढ़ रहा है?
मंत्री बोले- हाथी अभयारण्य की जरूरत नहीं
नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने घने वनक्षेत्रों में खनन की अनुमति पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था, इन गतिविधियों की वजह से हाथी आबादी की तरफ आ रहा है। उन्होंने पूछा कि सरकार पुराने प्रस्ताव के अनुरूप लेमरु में हाथी अभयारण्य घोषित करेगी। वन मंत्री महेश गागड़ा का कहना था, तमोर-पिंगला में एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जा रहा है। हाथी तो विचरण करने वाला जीव है, उसके लिए हाथी अभयारण्य की जरूरत नहीं है।
मुआवजा बढ़ाने की भी उठी मांग
विधायक अमरजीत भगत ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था, हाथी के हमले में मृत्यु पर १० लाख रुपए। मकान को नुकसान पर ३ लाख रुपए और फसल नुकसानी का मुआवजा ५० हजार रुपए एकड़ होना चाहिए। उन्होंने मोटर यान कानून की तरह घायल व्यक्तियों को ईलाज के लिए एकमुश्त २५ हजार रुपए देने और शेष का भुगतान बिल प्रस्तुत करने पर करने की मांग की।